Gaushala Project in Bareilly : बरेली छावनी परिषद ने आवारा गोवंश संरक्षण, देसी नस्लों के संवर्धन और पशु कल्याण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक आधुनिक गौशाला के निर्माण की शुरुआत की है। यह परियोजना थिरिया रोड क्षेत्र में विकसित की जा रही है, जिसे एक वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से उन्नत केंद्र के रूप में तैयार किया जाएगा।
भूमि पूजन के साथ परियोजना की शुरुआत
इस परियोजना का भूमि पूजन एवं शिलान्यास उत्तर प्रदेश सरकार के पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर बरेली छावनी के सांसद छत्रपाल गंगवार, विधायक संजीव अग्रवाल, वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

1000 से अधिक पशुओं की क्षमता वाली आधुनिक गौशाला
प्रस्तावित गौशाला में 1000 से अधिक गोवंश को रखने की क्षमता होगी। इसे इस तरह से डिजाइन किया जा रहा है कि पशुओं को बेहतर देखभाल, स्वच्छ वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। इसमें पर्याप्त हवादार पशुशालाएं, मातृत्व एवं बछड़ा देखभाल इकाइयां, उपचार केंद्र और क्वारंटीन सुविधाएं शामिल होंगी।
आधुनिक तकनीक और पर्यावरण अनुकूल व्यवस्था
गौशाला परिसर में सौर ऊर्जा प्रणाली, बायोगैस एवं बायो-CNG उत्पादन, वर्षा जल संचयन और जैविक खाद निर्माण जैसी हरित तकनीकों को शामिल किया जाएगा। इसके माध्यम से इसे पर्यावरण के अनुकूल और आत्मनिर्भर मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा।
वैज्ञानिक पशु प्रबंधन की दिशा में पहल
परियोजना में स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, वैज्ञानिक चारा प्रबंधन, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और सीसीटीवी निगरानी जैसी आधुनिक सुविधाएं भी शामिल की जाएंगी। इससे पशु देखभाल को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
प्रशासनिक और धार्मिक संरचनाओं का भी होगा समावेश
गौशाला परिसर में प्रशासनिक भवन, यज्ञशाला, गो मंदिर, अतिथि गृह और चारा प्रबंधन प्रणाली जैसी संरचनाएं भी प्रस्तावित हैं। यह इसे एक समग्र और बहुउद्देश्यीय केंद्र के रूप में विकसित करेगा।
नेतृत्व की भूमिका और सरकार की सराहना
इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि यह परियोजना बरेली छावनी परिषद के नवाचार और विकासात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती है। पशुपालन मंत्री ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह मॉडल देश के अन्य क्षेत्रों के लिए प्रेरणादायक साबित हो सकता है।
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सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
यह गौशाला परियोजना न केवल पशु कल्याण को बढ़ावा देगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी। इसे एक सतत और आधुनिक विकास मॉडल के रूप में देखा जा रहा है।
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