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पश्चिम एशिया में संकट के बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अहम बैठक, तीनों सेनाओं के प्रमुख भी रहे मौजूद, जानें किन मुद्दों को लेकर हुई चर्चा

Rajnath Singh ,important meeting

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नई दिल्लीः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक का उद्देश्य हाल ही में दुनिया और खासकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारत की रक्षा तैयारियों की समीक्षा करना था। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए देश पूरी तरह तैयार रहे। यह बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में दिए गए संबोधन के बाद हुई। उन्होंने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता जताई और बताया कि सरकार इस संकट के असर को कम करने के लिए काम कर रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने सात विशेष समूह (Empowered Groups) बनाए हैं। ये समूह अलग-अलग क्षेत्रों जैसे ईंधन (Fuel),  सप्लाई चेन (Supply Chain) , उर्वरक (Fertilizer)  और अन्य जरूरी सेक्टर में रणनीतियां तैयार कर रहे हैं, ताकि भारत पर इस संघर्ष का असर कम से कम पड़े।

बैठक में शामिल हुए बड़े सैन्य अधिकारी
इस समीक्षा बैठक में देश के कई बड़े रक्षा अधिकारी भी शामिल हुए, जैसे सीडीएस अनिल चौहान, एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह, जनरल उपेंद्र द्विवेदी, एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, डीआरडीओ प्रमुख DRDO के अध्यक्ष समीर कामत। इन सभी ने मिलकर देश की सुरक्षा स्थिति और तैयारियों पर चर्चा की।

पश्चिम एशिया में तनाव क्यों बढ़ा?
पश्चिम एशिया में संघर्ष अब चौथे हफ्ते में पहुंच गया है। हालात 28 फरवरी के बाद और बिगड़ गए। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। उनकी उम्र 86 साल थी। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया।

ईरान की जवाबी…
हमले के जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में अमेरिका और इजरायल से जुड़ी संपत्तियों को निशाना बनाया। इसका असर यह हुआ कि होर्मुज स्ट्रेट (महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता) से व्यापार प्रभावित हुआ। तेल और गैस की सप्लाई में बाधा आई। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार प्रभावित हुआ। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ने लगा।

प्रधानमंत्री ने स्थिति को बताया चिंताजनक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में इस स्थिति को “चिंताजनक” बताया। उन्होंने कहा कि सरकार हर पहलू पर नजर रख रही है और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठा रही है। संभावना है कि प्रधानमंत्री राज्यसभा में भी इस मुद्दे पर विस्तार से बयान देंगे और बताएंगे कि भारत इस संकट से कैसे निपटने की तैयारी कर रहा है।

 

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