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गांव पहुंचा मेजर शुभम सैनी का पार्थिव शरीर, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल

Major Shubham Saini death

Major Shubham Saini death

नेशनल डेस्क: देहरादून में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय सेना के मेजर शुभम सैनी का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक गांव घसौली पहुंच गया। जैसे ही उनका शव गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही हैं।

मेरठ के रोहटा थाना क्षेत्र के घसौली गांव निवासी 27 वर्षीय मेजर शुभम सैनी शनिवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे देहरादून-चकराता मार्ग पर एक हादसे का शिकार हो गए। उनकी कार चकराता के छावनी क्षेत्र में बंगला नंबर 10 के पास करीब 50 मीटर गहरी खाई में गिर गई। हादसे की सूचना मिलते ही सैन्यकर्मी मौके पर पहुंचे और गंभीर रूप से घायल मेजर शुभम को खाई से बाहर निकाला गया। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें तुरंत सैनिक अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

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परिजनों के अनुसार, मेजर शुभम किसी काम से चकराता से देहरादून जा रहे थे। रास्ते में सामने से आ रहे एक वाहन को बचाने की कोशिश में उनकी कार से नियंत्रण हट गया और वह गहरी खाई में जा गिरी। मेजर शुभम चकराता स्थित 2-2 बटालियन के मुख्यालय में तैनात थे। उन्होंने वर्ष 2019 में लेफ्टिनेंट के पद पर सेना में कमीशन प्राप्त किया था और बाद में उन्हें मेजर पद पर पदोन्नति मिली।

हादसे की खबर मिलते ही गांव में मातम पसर गया। मेजर शुभम अविवाहित थे। उनके बड़े भाई तुषार और बहन निधि भी अविवाहित हैं। परिवार के सदस्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे हुए हैं। पोस्टमार्टम के बाद रविवार सुबह उनका पार्थिव शरीर गांव लाया गया, जहां उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। परिवार के लिए यह हादसा इसलिए भी ज्यादा दुखद है क्योंकि 18 फरवरी को मेजर शुभम के बड़े भाई तुषार की शादी तय थी। शुक्रवार को ही शुभम ने अपने पिता से फोन पर कहा था कि वह जल्द ही छुट्टी लेकर घर आएंगे और भाई की शादी की तैयारियों में मदद करेंगे। लेकिन शनिवार को देहरादून से आई एक कॉल ने पूरे परिवार की खुशियों को गहरे शोक में बदल दिया। बेटे की मौत की खबर सुनते ही पिता सत्येंद्र सैनी, मां रीता और अन्य परिजन बेसुध हो गए।

मेजर शुभम के पिता सत्येंद्र सैनी खुद सेना से सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हैं। परिवार में मां रीता, बड़ा बेटा तुषार और एक बेटी हैं। तुषार नोएडा की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर हैं, जबकि बेटी आर्मी स्कूल में शिक्षिका हैं। पिता ने बताया कि शुभम ने 2015 में आर्मी स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास की थी। इसके बाद उनका चयन एनडीए में हुआ और उन्होंने पुणे में तीन साल की कठिन ट्रेनिंग पूरी की। 2019 में देहरादून में उनकी पासिंग आउट परेड हुई थी। पहली पोस्टिंग पंजाब के भटिंडा में मिली थी और पिछले तीन वर्षों से वह देहरादून के चकराता में मेजर के पद पर तैनात थे।

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पिता और भाई ने रोते हुए बताया कि उन्हें क्या पता था कि शुक्रवार को की गई फोन पर बातचीत शुभम से उनकी आखिरी बात होगी। पिता ने कहा कि उन्होंने बेटे के सिर पर शादी का सेहरा देखने का सपना देखा था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। आज बेटा तिरंगे में लिपटकर घर लौटा है।

परिजनों का कहना है कि शुभम को बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। वह पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक रूप से भी खुद को तैयार करता था। गांव के लोगों के अनुसार, मेजर शुभम सैनी न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गांव के लिए गर्व का विषय थे। उन्होंने सेना में रहकर देश और गांव दोनों का नाम रोशन किया। आज उनके जाने से गांव में गहरा शोक है और हर आंख नम है।

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