सनातन धर्म में दीपक प्रज्वलित करने का अपना ही महत्व है। आपको पता होना चाहिए कि घी, सरसों के तेल, तिल के तेल, नारियल के तेल, कपूर के तेल और पंचदीप प्रज्वलित करने का क्या महत्व है।
हमारे धर्म में दीपक सिर्फ अंधकार मिटाने का ही साधन नहीं, बल्कि इसे चेतना, सकारात्मकता और साक्षात दैवीय ऊर्जा का प्रतीक मानते हैं। तेल या घी का दिया जलाने से जीवन का तमस अर्थात अंधेरा दूर होता है और उम्मीद की नई रोशनी जागती है, लेकिन शास्त्रों में तेल और घी के दिए लगाने के आध्यामिक महत्व भी बताए है। ऋषि मुनियों ने भी घी का दीपक और तेल का दीपक जलाने से मिलने वाले आध्यमिक लाभों का वर्णन किया है। आईये जानते हैं कौन-सा दीपक जलाने से क्या फायदा होता है।
सरसों के तेल का दीपक
हमारी मान्यताओं और शास्त्रों में अंकित महत्व के अनुसार सरसों के तेल का दीपक नकारात्मक ऊर्जा का नाश करता है. इसे प्रज्वलित करने से बुरी नजर और बाधाओं से रक्षा होती है। सरसों के तेल का दीपक शनिवार, अमावस्या और विशेष पूजाओं में प्रज्वलित करना चाहिए।
तिल के तेल का दीपक
कुंडली में शनि ग्रह के नकारात्मक प्रभावों से राहत पाने के लिए तिल के तेल का दीपक जलाएं। इसे प्रज्वलित करने से शनि दोष शांत होता है और पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। तिल के तेल का दीपक दीर्घायु प्रदान करता है। इसे शनिवार, अमावस्या और पितृ पक्ष में जला सकते हैं।
घी का दीपक
अधिकतर सनातन धर्म को मानने वाले घरों में पूजा के समय घी का दीपक प्रज्वलित किया जाता है। ये सुख, शांति, समृद्धि, आरोग्य और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है। वैसे तो रोजाना घी का दीपक लगा सकते हैं, लेकिन पूर्णिमा, शुक्रवार और गुरुवार को घी का दीपक जलाने का विशेष महत्व है।
नारियल के तेल का दीपक
नारियल के तेल का दीपक सभी मनोकामनाओं की पूर्ति करता है। ये धन लाभ और सौभाग्य का कारक है। आप चाहें तो सोमवार, शुक्रवार और पूर्णिमा की पूजा में सुबह-शाम नारियल के तेल का दीपक लगा सकते हैं। आध्यात्मिक उन्नति, ईश्वर की कृपा, घर में पवित्रता और सकारात्मकता का संचार करता है।
पंचदीप और अन्य
आप प्रतिदिन संध्या आरती, विशेष पूजा या हवन में घी और कपूर मिलाकर दीपक प्रज्वलित कर सकते हैं। पंचदीप में पांच तेलों का मिश्रण होता है जो पंचतत्वों को संतुलित करते हर तरह की बाधा को दूर करता है। रोजाना पंचदीप प्रज्वलित करने से सुख-समृद्धि आती है। आप चाहें तो नियमित पूजा में गृह प्रवेश, हवन या पाठ करते समय भी पंचदीप जला सकते हैं।
इन बातों का रखें खास ध्यान
- दीपक चाहे घी का हो या तेल का। हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में साफ और स्वच्छ स्थान पर ही प्रज्वलित करना चाहिए।
- दीपक प्रज्वलित करते समय सकारात्मक भाव और मंत्रों का जाप करते रहना चाहिए।
- नियमित रूप से दूपर जलाने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।Also Read :-https://dainiksaveratimes.com/national/rabris-residence-political-issue-tej-pratap-says-former-cm-should-vacate-residence-bihar-politics/https://dainiksaveratimes.com/national/nepal-pm-comments-against-india-forced-to-give-clarification/
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