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दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने सिंधी समाज के साथ साझा किया आत्मीय संवाद का अनुभव

नई दिल्ली: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आज भारत मंडपम में सिंधी समाज के सम्मानित सदस्यों से आत्मीय संवाद का अवसर प्राप्त किया। यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं था, बल्कि एक भावनात्मक यात्र का अनुभव था, जो सिंधी सभ्यता, मिट्टी और संस्कृति की महानता को दशार्ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंधी समाज ने हमेशा सहिष्णुता, परिश्रम और प्रेम का संदेश दिया है। उनका योगदान न केवल भारत में, बल्कि पूरी दुनिया में सामाजिक समरसता और सकारात्मक दृष्टिकोण के लिए प्रेरणा का स्नेत है। रेखा गुप्ता ने जोर दिया कि यह समाज हमें यह सिखाता है कि अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहकर भी हम दुनिया को दिशा और प्रेरणा दे सकते हैं।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने फेडरेशन ऑफ वल्र्ड सिंधी एसोसिएशन की प्रशंसा करते हुए उनके निरंतर प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से जोड़ने का अवसर मिलता है। रेखा गुप्ता ने विशेष रूप से ईष्टदेव झूलेलाल जी की कृपा का उल्लेख किया और कहा कि उनकी आशीर्वाद से यह आयोजन एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव के रूप में विकसित हुआ। उन्होंने बताया कि यह संवाद न केवल समाज के लिए बल्कि दिल्ली के नागरिकों के लिए भी एक शिक्षाप्रद अवसर साबित हुआ, जिसमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक एकता की भावना को बल मिला।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ऐसे कार्यक्रमों का समर्थन करती रहेगी, जो विभिन्न समुदायों के बीच सामंजस्य और पारस्परिक समझ को बढ़ावा दें। उन्होंने सिंधी समाज के सदस्यों से कहा कि उनकी सांस्कृतिक और सामाजिक पहल दूसरों के लिए प्रेरणा का स्नेत है और उन्हें इस मार्ग पर लगातार आगे बढ़ना चाहिए। कार्यक्रम में शामिल गणमान्य व्यक्तियों और समाज के वरिष्ठ सदस्यों ने भी मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया और इस संवाद को भविष्य के लिए मार्गदर्शक बताया।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के इस आत्मीय और खुले संवाद ने आयोजन को और भी विशेष और यादगार बना दिया। सिंधी समाज की इस यात्र और उनके योगदान को मान्यता देने के लिए फेडरेशन ऑफ वल्र्ड सिंधी एसोसिएशन को मुख्यमंत्री ने हार्दिक साधुवाद और मंगलकामनाएं दीं। उन्होंने सभी से अपील की कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करें और आने वाली पीढ़ियों तक इसे पहुँचाने का प्रयास जारी रखें। यह आयोजन संस्कृति, आध्यात्म और समाज सेवा का अद्भुत संगम साबित हुआ, जिसने दिल्ली में विविधता और सामंजस्य की मिसाल पेश की।

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