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दिल्ली की अदालत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि मामले की कार्यवाही पर रोक से किया इनकार

August 2, 2023

दिल्ली की अदालत ने राजस्थान के मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि मामले की कार्यवाही पर रोक से किया इनकार

नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ संजीवनी क्रेडिट सहकारी समिति घोटाला के संबंध में भ्रामक बयानों के लिए दायर मानहानि शिकायत की कार्यवाही पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।हालांकि, अदालत ने गहलोत को वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने की अनुमति दे दी।

गहलोत ने सोमवार को इस मामले में एक मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा उन्हें जारी किए गए समन को सत्र अदालत में चुनौती दी। राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश एम.के. नागपाल ने मंगलवार को कहा कि 7 अगस्त को मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष गहलोत की शारीरिक और व्यक्तिगत उपस्थिति व्यावहारिक रूप से सुविधाजनक और आवश्यक नहीं हो सकती, लेकिन उन्हें कार्यवाही पर रोक लगाने का कोई आधार नहीं दिखता।अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट हरजीत सिंह जसपाल ने 6 जुलाई को मामले में गहलोत को समन जारी किया था और उन्हें 7 अगस्त को पेश होने का आदेश दिया था। न्यायाधीश ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वह 7 अगस्त को गहलोत की भौतिक उपस्थिति पर जोर न दें और उन्हें वीसी के माध्यम से कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति दें।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हालांकि 7 अगस्त, 2023 को उपरोक्त मामले में एसीएमएम के समक्ष एक आरोपी के रूप में याचिकाकर्ता की शारीरिक और व्यक्तिगत उपस्थिति व्यावहारिक रूप से सुविधाजनक और आवश्यक नहीं हो सकती है, लेकिन इस अदालत को उपरोक्त शिकायत मामले की कार्यवाही पर रोक लगाने के लिए कोई कारण या आधार नहीं दिखता है या याचिकाकर्ता द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) मोड के माध्यम से उक्त अदालत में उपस्थिति क्यों दर्ज नहीं की जा सकती।’’

न्यायाधीश नागपाल ने गहलोत के आवेदन पर मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त को तय की। उन्होंने शेखावत को अपना औपचारिक जवाब और तथ्यों के साथ-साथ कानून पर विस्तृत दलीलें दाखिल करने का भी निर्देश दिया। इससे पहले कोर्ट ने पुलिस को शेखावत की शिकायत की जांच करने का निर्देश दिया था। न्यायाधीश जसपाल ने कहा था कि जांच ऐसी होनी चाहिए, जिससे इन तीन सवालों के जवाब मिल सकें – क्या शिकायतकर्ता शेखावत को आरोपी गहलोत द्वारा संजीवनी घोटाले में ‘आरोपी‘ के रूप में संबोधित किया गया था, क्या गहलोत ने कहा था कि शेखावत के खिलाफ आरोप साबित हुए हैं और क्या शेखावत या उनके परिवार के सदस्यों को घोटाले की जांच में ‘आरोपी‘ के रूप में सूचीबद्ध किया गया है – का उत्तर दिया गया है।

शेखावत ने इस साल मार्च में गहलोत के खिलाफ मानहानि का मामला दायर किया था और कहा था कि मामले में जांच शुरू की गई थी, लेकिन उनके नाम का कहीं भी उल्लेख नहीं किया गया था और उन्होंने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत आपराधिक मानहानि के लिए गहलोत के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की थी। उन्होंने अपनी प्रतिष्ठा के नुकसान के लिए उचित वित्तीय मुआवजे की भी मांग की है। इससे पहले, संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी घोटाले को लेकर गहलोत और शेखावत के बीच जुबानी जंग तेज हो गई थी और राजस्थान के मुख्यमंत्री ने खुले तौर पर केंद्रीय मंत्री को ‘अन्य लोगों की तरह दोषी‘ घोषित कर दिया था।

’केंद्रीय मंत्री संजीवनी सहकारी समिति लिमिटेड घोटाले के मामले में जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की जांच में उनके खिलाफ भी अन्य गिरफ्तार आरोपियों की तरह ही उन्हीं धाराओं के तहत अपराध साबित हुआ है।’ शेखावत ने कहा था कि गहलोत द्वारा उन्हें संजीवनी घोटाले में आरोपी बताया जाना ’हिसाब बराबर करने के लिए उनकी राजनीतिक हत्या’ करने जैसा है। उन्होंने कहा था, ‘एसओजी ने तीन आरोपपत्र पेश किए, लेकिन उनमें कहीं भी मेरा या मेरे परिवार का नाम नहीं है। फिर भी मुख्यमंत्री ने मुझे आरोपी कहा।‘

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