नेशनल डेस्क। दिल्ली के सब्जी मंडी रेलवे थाना क्षेत्र में हुए ब्लाइंड मर्डर केस शुरू में एक रहस्य बन गया था, लेकिन अशोक विहार पुलिस की टीम ने सिर्फ 12 घंटे में इसे सॉल्व कर दिखाया। पुलिस ने पांच आरोपियों को पकड़ा है और आगे की कार्रवाई जारी है।
मामला तब सामने आया जब 6 दिसंबर को 3:16 बजे पुलिस को एक पीसीआर कॉल आया कि डब्ल्यूपीआईए की झुग्गियों के पास रेलवे ट्रैक पर एक लाश पड़ी है। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और देखा कि 25 से 30 साल का एक युवक खून से सना पड़ा है। उसके चेहरे, गले और गर्दन पर कई धारदार हथियारों से वार किए गए थे। चोटें इतनी गहरी थीं कि चेहरा पहचानने लायक भी नहीं बचा था। यह मामला रेलवे एरिया का था, इसलिए फौरन इसे पुलिस स्टेशन सब्जी मंडी रेलवे को ट्रांसफर किया गया।
मामला बेहद संवेदनशील था, इसलिए एसीपी अशोक विहार आकाश रावत की निगरानी में एक स्पेशल टीम बनाई गई। जांच की जिम्मेदारी इंस्पेक्टर धर्मेंद्र कुमार को दी गई, जिनके साथ एसआई नवीन, हेड कांस्टेबल करण पाल, कांस्टेबल भूपेश, कांस्टेबल संदीप और कांस्टेबल दिनेश की टीम लगातार काम पर लगी रही।
शव का पहचान करना सबसे बड़ी चुनौती थी। लगातार कोशिशों के बाद टीम यह पता लगाने में सफल हुई कि मृतक का नाम मोनू उर्फ मनोज था, जो सीएसए कॉलोनी, डब्ल्यूपीआईए का रहने वाला और अशोक विहार थाने का रजिस्टर्ड बैड कैरेक्टर था। उसके खिलाफ 7 गंभीर मामले पहले से दर्ज थे।
पहचान होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आसपास के सीसीटीवी फुटेज चेक किए, जिसमें कुछ संदिग्ध दिखाई दिए। पुलिस ने टीम बनाकर 5 आरोपियों को गिफ्तार किया। पकड़े गए सभी आरोपी नाबालिग है। पुलिस के अनुसार ये पांचों इस हत्या में सीधे शामिल थे।
पुलिस पूछताछ में सभी आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल किया और पता चला कि मोनू इन पांचों नाबालिगों से चोरी और छोटे-मोटे अपराध करवाता था। बाद में पैसे के बंटवारे को लेकर झगड़ा होने लगा। इस विवाद इतना बढ़ गया कि पांचों लड़कों ने मोनू पर चाकू और पेचकस से कई वार कर उसकी हत्या कर दी। फिलहाल पांचों आरोपी पकड़े जा चुके हैं और आगे की जांच जारी है।

