नई दिल्ली : दिल्ली हाईकोर्ट ने रविवार को जलवायु कार्यकर्त्ता सोनम वांगचुक के सफदरजंग अस्पताल में जारी इलाज के मामले में दखल देने से इंकार कर दिया। जस्टिस मिनी पुष्करणा ने कहा कि इस चरण में सोनम वांगचुक को निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने संबंधी उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो की याचिका पर किसी अंतरिम आदेश की आवश्यकता नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 24 जुलाई को होगी।
शनिवार को भूख हड़ताल के 21वें दिन दिल्ली पुलिस वांगचुक को जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल ले गई थी।
वांगचुक 28 जून से नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और परीक्षा रद्द होने के बाद कई छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने के विरोध में भूख हड़ताल कर रहे थे। रविवार को विशेष सुनवाई के दौरान जस्टिस पुष्करणा ने कहा कि सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टर वांगचुक की लगातार निगरानी कर रहे हैं और यह नहीं कहा जा सकता कि उनके खिलाफ किसी प्रकार की जबरदस्ती की जा रही है। जज ने यह भी कहा कि सरकार द्वारा वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल ले जाए जाने की कार्रवाई को मनमाना नहीं कहा जा सकता।
दिल्ली हाईकोर्ट के 16 जुलाई के उस आदेश का संज्ञान लेते हुए, जिसमें अधिकारियों को सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी करने और आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप करने का निर्देश दिया गया था, जस्टिस मिनी पुष्करणा ने कहा कि चूंकि वांगचुक स्वयं किसी अस्पताल में भर्ती नहीं हुए थे, इसलिए उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सरकार का उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाना ‘उसके अधिकार क्षेत्र’ में था। कोर्ट ने कहा, वर्तमान चरण में इस मामले में किसी भी प्रकार का अंतरिम आदेश देने की आवश्यकता नहीं है।
जस्टिस पुष्करणा ने यह भी उल्लेख किया कि वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो, उनके भाई और रिश्तेदारों को उनसे 24 घंटे मिलने की अनुमति दी गई है। जज ने कहा कि परिवार के सदस्यों को ‘अभूतपूर्व तरीके’ से वांगचुक से मिलने की इजाजत दी गई है और उन्हें अस्पताल में एक कमरा भी दिया गया है। जस्टिस पुष्करणा ने वांगचुक को निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने के अनुरोध वाली आंग्मो की याचिका पर केंद्र सरकार, सफदरजंग अस्पताल और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया तथा उनसे 3 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

