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दिल्ली हाईकोर्ट ने जिमखाना क्लब पर लगाए गए 2 करोड़ से ज्यादा के टैक्स की मांग को रखा बरकरार

नई दिल्ली ; दिल्ली हाईकोर्ट ने जिमखाना क्लब पर 2.92 करोड़ रुपये का लक्जरी टैक्स (विलासिता कर) लगाने के दिल्ली सरकार के साल 2014 के फैसले को बरकरार रखा है। दिल्ली विलासिता कर अधिनियम के तहत उठाई गई मांग के खिलाफ क्लब की चुनौती को खारिज करते हुए, न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा और रविंदर डुडेजा की पीठ ने कहा कि इस फैसले को 2012 के संशोधन अधिनियम के बाद के आकलन के लिए एक मिसाल नहीं माना जाना चाहिए।

हाईकोर्ट ने शुरू में क्लब को पूर्व शर्त के रूप में तीन लेखा वर्षों 2009-10, 2010-11 और 2011-12 के लिए कुल 2.92 करोड़ रुपये में से 1.45 करोड़ रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया था। अदालत का फैसला दिल्ली जिमखाना क्लब की तरफ से दायर पर याचिका पर आया है। जिसमें कहा गया था कि कर की मांग अनुचित थी और उचित सुनवाई के बिना की गई। पारस्परिकता के सिद्धांत द्वारा शासित एक सामाजिक क्लब के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने वाले क्लब ने आवास (अकोमोडेशन) के लिए सदस्यों से एकत्र की गई राशि पर विलासिता कर के अधीन एक होटल व्यवसायी के रूप में व्यवहार किए जाने के खिलाफ तर्क दिया।

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