Delhi Plans Bottle Return Scheme With Refunds : नई दिल्ली। दिल्ली में प्लास्टिक कचरे पर लगाम लगाने के लिए बोतल-वापसी योजना लागू करने की तैयारी है। इसके तहत इस्तेमाल की जा चुकी प्लास्टिक की बोतलें लौटाने पर उपभोक्ताओं को पैसा वापस मिल सकेगा। शुरुआती चरण में प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की योजना है। उत्तराखंड और गोवा के सफल मॉडल से प्रेरित इस पहल का उद्देश्य रीसाइक्लिंग बढ़ाना और प्लास्टिक कचरे का व्यवस्थित प्रबंधन सुनिश्चित करना है।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में इस्तेमाल की जा चुकी प्लास्टिक की बोतलों के रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष ‘बोतल-वापसी योजना’ लागू करने पर विचार कर रही है। उत्तराखंड और गोवा में सफलतापूर्वक चल रही ऐसी ही पहल से प्रेरणा लेकर दिल्ली में ऐसा होने जा रहा है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन को एक सुसंगत और व्यवस्थित रूप देना है। इसका लक्ष्य लोगों को “इस्तेमाल करो, वापस करो और रिकवर करो” की आदत की ओर मोड़ना है। दिल्ली में रोजाना करीब 1,500 टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से लगभग 19 प्रतिशत हिस्सा बिना रिसायकल हुए रह जाता है।
भारत में साल 2022 से ही सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर प्रतिबंध लागू है, लेकिन इस नई योजना से कचरा प्रबंधन में बड़े बदलाव की उम्मीद है। शुरुआती चरण में सरकार इस योजना को दिल्ली के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू करेगी, जिसके बाद इसे पूरे शहर में विस्तारित किया जाएगा। पारदर्शिता और आसानी सुनिश्चित करने के लिए बोतलों पर विशेष क्यूआर (QR) कोड दिए जाएंगे, जिन्हें स्कैन करके उपभोक्ता आसानी से अपना रिफंड दावा कर सकेंगे। इस पूरी योजना की रूपरेखा तैयार करने के लिए पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा की अध्यक्षता में बैठक भी हो चुकी है, जिसमें गोवा और उत्तराखंड के विशेषज्ञों से विचार-विमर्श किया गया है।
यहां से ले रहे प्रेरणा
उत्तराखंड ने साल 2022 में केदारनाथ धाम से इस योजना की शुरुआत एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में की थी, जहाँ पर्यटकों और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। इस पहल की अपार सफलता के लिए राज्य को ‘डिजिटल इंडिया अवॉर्ड’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। उत्तराखंड में बोतल वापसी की दर जो शुरुआत में 20 से 22 प्रतिशत थी, वह अब बढ़कर करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसी तरह गोवा में भी प्लास्टिक की बोतलों पर 5 रुपये का डिपॉजिट रखकर इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। इसके अलावा सिंगापुर, हांगकांग और यूके जैसे कई देशों में भी यह मॉडल बेहद सफल रहा है।

