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लोकसभा में NEET पर हंगामा, धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो के लगे नारे

Dharmendra Pradhan's resignation sought

Dharmendra Pradhan's resignation sought

Dharmendra Pradhan’s resignation sought : नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत पहले ही दिन तीखे राजनीतिक टकराव के साथ हुई। विपक्ष ने सोनम वांगचुक के अनशन, NEET-UG पेपर लीक, एसआईआर (SIR), महंगाई और राम मंदिर चढ़ावा चोरी जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरने की रणनीति अपनाई।

पहले विपक्ष ने किया विरोध

इससे पहले विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में विभिन्न मुद्दों पर विरोध-प्रदर्शन किया और सरकार से जवाब की मांग की। विपक्ष का कहना है कि जनता से जुड़े अहम मुद्दों पर सरकार को सदन में स्पष्ट जवाब देना चाहिए। सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह सभी मुद्दों पर सदन के नियमों के तहत चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष बेवजह व्यवधान पैदा कर रहा है।
मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों और जनहित से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होने की संभावना है, ऐसे में सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं।

मांगते रहे धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा

लोकसभा में पहले ही दिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और उससे जुड़े विवाद में छात्रों की मौत का मुद्दा उठाया। कांग्रेस सांसदों ने इन छात्रों को श्रद्धांजलि देने की भी मांग की। हंगामे के बीच कई सांसद नारे लगाते हुए स्पीकर की सीट तक पहुंच गए। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनसे शांत रहने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि नारेबाजी से नहीं, बल्कि तर्क और चर्चा से बात रखनी चाहिए। जब हंगामा नहीं रुका तो करीब 12 मिनट बाद सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर विपक्ष ने फिर ‘न्याय दो’ और ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ के नारे लगाए।

प्रधानमंत्री की वही घिसी-पिटी बात : कांग्रेस

कांग्रेस की ओर से कहा गया कि पीएम ने एक बार फिर वही पुरानी बातें दोहराईं, लेकिन राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी, NEET-UG पेपर लीक और विपक्षी दलों को तोड़ने के आरोप जैसे अहम मुद्दों पर कुछ नहीं कहा। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र और संविधान के संघीय ढांचे को कमजोर करने से जुड़े सवालों पर भी चुप्पी साधे रखी। विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी सांसदों के जोरदार हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। तीन बार स्थगित करने के बाद भी सदन में व्यवस्था नहीं बन सकी, जिसके चलते लोकसभा की कार्यवाही आखिरकार दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

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