
नालागढ़ : सतलुज नदी में बहकर आये प्लास्टिक वेस्ट मैटीरियल के कबाड़ पर तीन राज्य आमने-सामने आ गए हैं। पंजाब के रोपड़ से आप के विधायक दिनेश चड्ढा की ओर से यह मामला उठाने के बाद हिमाचल और हरियाणा में भी सवाल-जवाब तेज हो गए हैं। वही, हिमाचल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि हरियाणा के मढ़ांवाला क्षेत्र में स्क्रैप कारोबारियों द्वारा खुले में फेंका और बरसात में नदियों में बहाया जा रहा प्लास्टिक वेस्ट मैटीरियल अब हिमाचल के रास्ते पंजाब के रूपनगर तक पहुंच रहा है।
इससे सरसा व सतलुज नदी के प्रदूषित होने पर हिमाचल व हरियाणा के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संयुक्त कार्रवाई शुरू कर दी है। बोर्ड की जांच टीम ने जांच में पाया है कि हरियाणा के मढ़ांवाला क्षेत्र में स्क्रैप कारोबार से निकलने वाला प्लास्टिक और अन्य वेस्ट मैटीरियल नदी-नालों में बहाया जा रहा है। बरसात में यह सामग्री पानी के साथ सरसा नदी में पहुंचती है और आगे पंजाब की ओर जाकर सतलुज नदी में मिल रही है।
कई स्थानों पर इस तरह के प्लास्टिक वेस्ट को जलाने की भी जानकारी सामने आई है। इससे जहां जल स्रोत प्रदूषित हो रहा है, वहीं वायु प्रदूषण का खतरा भी पैदा हो रहा है। पंजाब के विधायक ने उठाया था मामला
मामला रूपनगर में उस समय सामने आया जब विधायक दिनेश चड्ढा की शिकायत पर रूपनगर हेड वर्क्स के पास सतलुज नदी में औद्योगिक कचरा, प्लास्टिक और अन्य अवशेष मिलने के बाद प्रशासन और पुलिस ने कार्रवाई की।
विधायक के अनुसार रूपनगर से पहले पंजाब की सीमा में ऐसा कोई बड़ा औद्योगिक केंद्र नहीं है, जबकि हिमाचल के बददी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में बड़ी संख्या में उद्योग स्थापित हैं। पुलिस की जांच के दौरान नदी में मिले कचरे के बीच एसएसएफ लिखा हुआ थर्मोकोल बोर्ड भी मिला। इसके आधार पर जांच को बददी क्षेत्र से जोडक़र देखा जा रहा है। हालांकि वेस्ट मैटीरियल वास्तव में किस उद्योग या कारोबारी से निकला और नदी में किसने डाला, इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी।