Last Updated: September 20, 2026

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नहीं देना होगा DND फ्लाईवे पर टोल, न्यायालय ने सुनाया फैसला 

December 20, 2024

नहीं देना होगा DND फ्लाईवे पर टोल, न्यायालय ने सुनाया फैसला 
DND Flyway : उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली को नोएडा से जोड़ने वाले दिल्ली-नोएडा-डायरेक्ट (DND) फ्लाईवे पर टोल वसूली के संबंध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2016 के आदेश को चुनौती देने वाली एक निजी कंपनी की याचिका को शुक्रवार को खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि DND फ्लाईवे टोलमुक्त रहेगा।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में निजी कंपनी को DND फ्लाईवे पर यात्रियों से टोल वसूली बंद करने का आदेश दिया था। इस निर्णय से फ्लाईवे पर प्रतिदिन आवागमन करने वाले लाखों लोगों को लाभ होगा।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्‍जवल भुइयां की पीठ ने कहा कि DND फ्लाईवे से यात्रा करने वाले यात्रियों से टोल वसूलने के लिए निजी कंपनी नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड (एनटीबीसीएल) को ठेका देना अन्यायपूर्ण, अनुचित और मनमाना है।
नोएडा प्राधिकरण की खिंचाई-
पीठ ने कहा, ‘‘(अब) उपभोक्ता या टोल शुल्क वसूली जारी रखने का कोई कारण नहीं है। हम मानते हैं कि (टोल संग्रह के लिए) समझौता अवैध है।’’ उच्चतम न्यायालय ने निजी कंपनी NTBCL को टोल संग्रह सौंपने के लिए नोएडा प्राधिकरण की खिंचाई की, जबकि NTBCL के पास पूर्व में टोल संग्रह का कोई अनुभव नहीं है। न्यायालय ने कहा कि इससे अनुचित लाभ हुआ है।
जनता को उठाना पड़ा करोड़ों रुपये का नुकसान-
पीठ ने कहा कि नोएडा ने शुल्क एकत्र करने या लगाने का अधिकार NTBCL को सौंपकर अपने अधिकार का अतिक्रमण किया है और इससे आम जनता को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सुनाया था फैसला- 
अक्टूबर 2016 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि 9.2 किलोमीटर लंबे, आठ लेन वाले DND फ्लाईवे का इस्तेमाल करने वालों से अब से कोई टोल नहीं वसूला जाएगा। यह आदेश उच्च न्यायालय ने फेडरेशन ऑफ नोएडा रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की जनहित याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किया था।
2012 में दी गई थी चुनौती-
वर्ष 2012 में दायर जनहित याचिका में ‘‘नोएडा टोल ब्रिज कंपनी द्वारा उपभोक्ता शुल्क के नाम पर टोल संग्रह और वसूली’’ को चुनौती दी गई थी। उच्च न्यायालय ने 100 से अधिक पन्नों के फैसले में कहा था, ‘‘जो उपभोक्ता शुल्क लगाया जा रहा है/वसूला जा रहा है, वह कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।’’ उच्च न्यायालय ने कहा था कि निजी कंपनी को जो अधिकार दिया गया है वह उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है।

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