मुंबई: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को E20 फ्यूल विवाद से जुड़े मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने सोशल मीडिया पर गडकरी से संबंधित डीपफेक वीडियो और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाई गई फर्जी और आपत्तिजनक तस्वीरों को तत्काल हटाने का अंतरिम आदेश दिया है।
यह आदेश जस्टिस अरिफ डॉक्टर की एकल पीठ ने गडकरी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप लड्ढा की दलीलें सुनने के बाद दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि संबंधित सामग्री बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक है तथा इसे किसी भी सार्वजनिक मंच पर उपलब्ध रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
याचिका में कहा गया था कि सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने नितिन गडकरी के नाम और तस्वीर का दुरुपयोग करते हुए डीपफेक वीडियो और AI से तैयार की गई फर्जी तस्वीरें बनाई हैं। इन पोस्टों में उन्हें E20 फ्यूल विवाद से जोड़कर गलत तरीके से पेश किया गया। इनमें से एक वीडियो इंस्टाग्राम रील के रूप में भी साझा किया गया था। गडकरी के वकील ने अदालत के सामने यह सामग्री प्रस्तुत की, जिसके बाद कोर्ट ने इस पर कड़ी टिप्पणी की।
अदालत ने कहा कि जिस सामग्री को हटाने की मांग की गई है, वह अश्लील, अभद्र और मानहानिकारक प्रकृति की है। इस तरह की सामग्री का सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर कोई स्थान नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसे बच्चे और युवा सहित कोई भी देख सकता है। कोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता ने अंतरिम राहत पाने के लिए पर्याप्त और मजबूत आधार प्रस्तुत किए हैं।
सुनवाई के दौरान मेटा और गूगल की ओर से भी अदालत में पक्ष रखा गया। दोनों कंपनियों ने अदालत को आश्वासन दिया कि याचिका में सूचीबद्ध सभी आपत्तिजनक वीडियो और तस्वीरों को उनके प्लेटफॉर्म से हटा दिया जाएगा। अदालत ने कंपनियों के इस बयान को रिकॉर्ड पर लिया। फिलहाल अदालत ने मामले में अंतरिम राहत देते हुए आपत्तिजनक सामग्री हटाने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
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