Last Updated: September 25, 2026

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नई दिल्ली में लगे भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर दर्ज की गई इतनी तीव्रता

March 9, 2026

नई दिल्ली में लगे भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर दर्ज की गई इतनी तीव्रता

नेशनल डेस्क: राजधानी नई दिल्ली और आसपास के इलाकों में सोमवार सुबह हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। जानकारी के अनुसार, हरियाणा के रेवाड़ी में भूकंप का केंद्र था। सुबह करीब 7 बजकर 1 मिनट पर लोगों ने धरती में हल्का कंपन महसूस किया, जिससे कई लोग कुछ समय के लिए घबरा गए। हालांकि भूकंप की तीव्रता कम होने के कारण किसी तरह के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है।

भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.8 दर्ज की गई। बताया गया है कि भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 5 किलोमीटर की गहराई में था। कम तीव्रता होने की वजह से इसका असर सीमित क्षेत्रों में ही महसूस किया गया। प्रशासन की ओर से भी स्थिति सामान्य बताई गई है और कहीं से भी किसी प्रकार की क्षति की सूचना नहीं मिली है।

दरअसल, हाल के वर्षों में देश और दुनिया के कई हिस्सों में भूकंप की घटनाएं पहले की तुलना में ज्यादा देखने को मिल रही हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी के अंदर कई बड़ी टेक्टोनिक प्लेट्स मौजूद हैं जो लगातार धीरे-धीरे अपनी जगह बदलती रहती हैं। जब इन प्लेट्स के बीच टकराव या घर्षण होता है, तो जमीन के अंदर ऊर्जा पैदा होती है और वही ऊर्जा भूकंप के रूप में बाहर निकलती है। कई बार यह कंपन इतना तेज होता है कि बड़े पैमाने पर नुकसान हो सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत का बड़ा हिस्सा भूकंप के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। देश के लगभग 59 प्रतिशत क्षेत्र में भूकंप का खतरा बना रहता है। इसी कारण वैज्ञानिकों ने भारत को चार भूकंप जोन में बांटा है, जिनमें जोन-2, जोन-3, जोन-4 और जोन-5 शामिल है। इनमें जोन-5 को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना जाता है, जबकि जोन-2 को अपेक्षाकृत कम खतरे वाला क्षेत्र माना जाता है।

दिल्ली को जोन-4 में रखा गया है, जिसे उच्च जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में 7 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आने की संभावना भी रहती है, जिससे भारी नुकसान हो सकता है। भारत में हिमालयी क्षेत्र, कच्छ और पूर्वोत्तर भारत जैसे इलाकों में भूकंप का खतरा ज्यादा माना जाता है, क्योंकि यहां भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच लगातार दबाव और टकराव होता रहता है।

भूकंप की ताकत को मापने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल किया जाता है। अगर भूकंप की तीव्रता 4 से 4.9 के बीच हो तो घर के अंदर रखा सामान हिल सकता है या गिर सकता है। 5 से 5.9 की तीव्रता में भारी फर्नीचर भी हिलने लगता है। 6 से 6.9 के बीच के भूकंप में इमारतों को नुकसान पहुंच सकता है। वहीं 7 से 7.9 की तीव्रता वाला भूकंप इमारतों को गिरा सकता है। अगर तीव्रता 8 या उससे अधिक हो जाए तो बड़ी तबाही और समुद्र में सुनामी का खतरा भी पैदा हो सकता है।

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बता दें रेवाड़ी में आए इस भूकंप की तीव्रता कम थी, इसलिए किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप के दौरान सतर्क रहना और सुरक्षा के नियमों का पालन करना बेहद जरूरी होता है।

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