Site icon Dainik Savera Times

Anil Ambani को ED ने फिर भेजा समन, जानिए क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली: कॉरपोरेट सेक्टर के जाने-माने बिजनेसमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें 14 नवंबर को पूछताछ के लिए तलब किया है। यह समन फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच के तहत जारी किया गया है। एजेंसी के आरोपों के मुताबिक यह मामला लगभग 17,000 करोड़ रुपये के कथित फंड डायवर्जन और बैंक लोन धोखाधड़ी से जुड़ा है।

यह अनिल अंबानी के लिए दूसरी बार ED की पूछताछ है। इससे पहले वे अगस्त 2025 में एजेंसी के सामने पेश हुए थे। इस बार ED की नजर उनके रिलायंस ADA ग्रुप की प्रमुख कंपनियों पर है, जिनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस (RCOM), रिलायंस होम फाइनेंस (RHFL), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस (RCFL), रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर (R-Infra) और रिलायंस पावर शामिल हैं।

40,000 करोड़ रुपये के लोन में कथित गड़बड़ी

ED का कहना है कि यह जांच CBI की FIR पर आधारित है। FIR में धोखाधड़ी, साजिश और भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। जांच में सामने आया है कि 2010 से 2012 के बीच अनिल अंबानी के ग्रुप ने करीब 40,000 करोड़ रुपये के लोन लिए, जिनमें से कई को बाद में बैंकों ने धोखाधड़ी वाले खाते घोषित कर दिया।

फंड डायवर्जन के आरोप

एजेंसी का दावा है कि लिए गए लोन का बड़ा हिस्सा सही तरीके से इस्तेमाल नहीं हुआ। जांच में पाया गया कि एक कंपनी के लोन से दूसरी कंपनी का कर्ज चुकाया गया, कुछ रकम रिलेटेड पार्टियों को ट्रांसफर की गई और करोड़ों रुपये म्यूचुअल फंड्स व फिक्स्ड डिपॉजिट्स में निवेश करके बाद में ग्रुप कंपनियों में लौटाया गया। इसके अलावा, लगभग 13,600 करोड़ रुपये एवरग्रीनिंग और 12,600 करोड़ रुपये रिलेटेड कंपनियों को ट्रांसफर किए गए।

ये भी पढ़ें: क्या iPhone कर रहा है आपकी जासूसी? जानें कैसे करें चेक

7500 करोड़ की संपत्ति अटैच

अब तक ED ने 7,500 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को अटैच कर लिया है। इसमें नवी मुंबई स्थित धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी (DAKC) की 132 एकड़ जमीन और देशभर में फैली 42 अन्य प्रॉपर्टीज शामिल हैं। हालांकि, अनिल अंबानी या उनके समूह की तरफ से इस पर कोई नया बयान नहीं आया है। पहले उन्होंने यह दावा किया था कि उनके सभी वित्तीय लेनदेन कानून और नियमों के दायरे में हुए। ED फिलहाल यह पता लगाने में जुटी है कि बैंकों से लिए गए पैसे आखिरकार कहां गए और क्या उन्हें विदेशी खातों के जरिए छिपाया गया।

Exit mobile version