नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बताया कि उसने हाल ही में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े धनशोधन मामले में 90 बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। मामले में कथित रूप से हरियाणा सरकार के 590 करोड़ रुपए की धनराशि गबन की गई है। संघीय जांच एजैंसी ने दावा किया कि केवल कागज पर चल रही (शेल) कंपनियों का इस्तेमाल और सोने की खरीद के लिए फर्जी बिलिंग के जरिए यह धोखाधड़ी की गई। प्रवर्तन निदेशालय ने 11 मार्च को चंडीगढ़ ट्राइसिटी (पंजाब में चंडीगढ़ और मोहाली तथा हरियाणा में पंचकुला), गुरुग्राम (हरियाणा) और बेंगलुरु (कर्नाटक) में कुल 19 स्थानों पर छापेमारी की।
ईडी ने कहा कि यह पाया गया कि आरोपी ने सार्वजनिक धन का गबन कई शेल कंपनियों के माध्यम से धन को इधर-उधर भेजकर और कई स्तर पर बांटकर किया। निदेशालय ने कहा कि अधिकांश धनराशि ज्वैलर्स के बैंक खातों के माध्यम से भेजी गई, ताकि फर्जी बिलिंग के जरिए सोने की खरीद का भ्रम पैदा किया जा सके। ईडी ने मामले में शामिल एक शेल कंपनी की पहचान स्वास्तिक देश प्रोजैक्ट्स प्रा. लि. के रूप में की, जिसके साझेदार स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंगला हैं। निदेशालय ने कहा कि यह घोटाला पिछले वर्ष बैंक के पूर्व कर्मचारियों की सहायता से अंजाम दिया गया, जिनमें ऋभव ऋषि शामिल हैं।
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