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लोगों पर कहर बनकर टूटा हाथी, अब तक 19 लोगों को सुला चुका है मौत की नींद

elephant attack in west singhbhum

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नेशनल डेस्क: पश्चिमी सिंहभूम जिले में जंगली हाथियों का आतंक बढ़ता ही जा रहा है। मझगांव प्रखंड के झारखंड-ओडिशा सीमा क्षेत्र स्थित बेनीसागर गांव में हाथी ने दो लोगों को पटक-पटक कर मार दिया। मरने वालों में 40 वर्षीय प्रकाश मालवा और एक नाबालिग बच्चा शामिल है। बीते 9 दिनों में जिले में हाथी के हमलों से मरने वालों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है।
बताया जाता है कि दोनों को पटक-पटक कर मारने के बाद हाथी काफी देर तक बच्चे के शव के पास ही खड़ा रहा। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और मझगांव थाना पुलिस मौके पर पहुंची और गांव वालों को सुरक्षित स्थानों पर रहने के लिए कहा।

नोवामुंडी प्रखंड के बाबाडिया गांव और हाटगम्हरिया के सियालजोड़ा गांव में एक ही रात में सात ग्रामीणों की मौत हो गई थी। भीड़ से भटका एक दांतेल हाथी गांवों में घुस आया और अलग-अलग टोलों में सो रहे लोगों पर हमला कर दिया।

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सबसे दर्दनाक घटना बाबाडिया गांव के मुंडा साईं टोला के साथ हुई, जहां कुंबा में सो रहे एक ही परिवार के चार सदस्यों सनातन मेराल (53), उनकी पत्नी जोलको कुई (51), छह वर्षीय मंगडू मेराल और आठ वर्षीय दमयंती मेराल को हाथी ने पटक-पटक कर मार डाला। परिवार की दस वर्षीय बेटी सुशीला मेराल बुरी तरह से जख्मी हो गई और 14 वर्षीय पुत्र जयपाल मेराल किसी तरह जान बचाकर भाग गया।

इसके बाद हाथी ने उलीहातु टोला पहुंचकर युवक गुरुचरण लागुरी (21) को कुचल दिया, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। बड़ापासेया गांव में भी हाथी के हमले से मंगल बोबोंगा ने भी मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं हाटगम्हरिया के सियालजोड़ा गांव में मां-बेटे पर हमला किया।

वन विभाग के अनुसार, यह वही हाथी है, जिसने गोइलकेरा और टोंटो प्रखंड में भी चार लोगों को कुचलकर मार डाला था। यह हाथी लगातार इलाका बदल रहा है। अलग-अलग ग्रामीण क्षेत्रों में घुसकर लोंगों पर हमला कर रहा है।

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वन विभाग की कार्रवाई नाकाम

अभी तक वन विभाग इस हाथी को पकड़ नहीं पाया है। गश्ती दल, माइकिंग और पटाखों के सहारे हाथी को जंगल की ओर खदेड़ने की कोशिश की जा रही है। गांव वालों का कहना है कि यह प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। लोग रात में घरों से बाहर निकलने से भी डर रहे हैं।

लगातार मौतों से मृतकों के परिजनों में काफी आक्रोश है। उन्होंने शीघ्र मुआवजा देने, प्रभावित गांवों में सुरक्षाबलों की तैनाती और हाथियों के स्थाई पुनर्वास की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात और भयावह हो सकते हैं।

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