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पाकिस्तानी हैंडल्स का फेक प्रोपेगेंडा उजागर, अरुणाचल में जवानों के अपमान से लेकर आर्मी चीफ के डांस तक; सोशल मीडिया पर फैलाई अफवाहें

Fake propaganda by Pakistani handles

Fake propaganda by Pakistani handles

Fake propaganda by Pakistani handles: पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स ने एक बार फिर भारतीय सेना व सेना प्रमुख के बारे में अफवाहें फैलाने की साजिश की है। पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सैनिकों के अपमान और सेना प्रमुख के नाइटक्लब में डांस का दावा किया। इसको लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक सामग्री फैलाने का मामला सामने आया है। फैक्ट चैक में ये दावे पूरी तरीके से गलत व निराधार पाए गए हैं। दरअसल इस फर्जी सोशल मीडिया सामग्री के जरिए भारतीय सेना की छवि खराब करने की कोशिश की गई है।

भारतीय सेना की फैक्ट चेक यूनिट के अनुसार, कई पाकिस्तानी सोशल मीडिया खातों से ऐसे दावे किए गए कि अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सैनिकों को अपमान का सामना करना पड़ रहा है जबकि सेना प्रमुख नाइट क्लब में डांस करते दिखाई दे रहे हैं। इस भ्रामक प्रचार में वीडियो के मूल स्वरूप को धुंधले दृश्यों और एआई की मदद से संपादित सामग्री के जरिए बदलकर पेश किया गया। साथ ही, सेना प्रमुख की तस्वीर को वीडियो पर इस तरह लगाया गया है कि उसके साथ दिया गया भ्रामक संदेश दर्शकों को गुमराह कर सके।

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सोशल मीडिया खातों की हुई पहचान
इस तरीके का उद्देश्य भारतीय सेना के खिलाफ नकारात्मक धारणा बनाना है। ऐसे 10 सोशल मीडिया खातों की पहचान की गई है। जानकारी के अनुसार, 28 अक्टूबर 2026 को रात 12 बजकर 40 मिनट से सुबह 8 बजे के बीच एक जैसी सामग्री प्रसारित करने वाले 10 सोशल मीडिया खातों की पहचान की गई है। इन्हें भ्रामक प्रचार के लिए अपनाया गया। इस मामले में धुंधले वीडियो, तस्वीरों को गलत संदर्भ में जोड़ने और सीमा से जुड़े दावों का इस्तेमाल करके एक भ्रामक कहानी तैयार की गई। ऐसी सामग्री देखने वाले लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की गई कि भारतीय सेना के जवानों की स्थिति खराब है और सेना का नेतृत्व इसके प्रति गंभीर नहीं है।

हालांकि यह पूरी तरह झूठ पर आधारित था। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के दावों के जरिए सेना के प्रति लोगों के भरोसे को प्रभावित करने और उसके खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की जा सकती है। सेना का कहना है कि इसलिए सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो या तस्वीर को साझा करने से पहले उसकी वास्तविकता की जांच करना जरूरी है।

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विश्वसनीय साक्ष्यों से करें पुष्टि
संबंधित जानकारी में लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी सामग्री पर भरोसा करने या उसे आगे साझा करने से पहले मूल वीडियो और विश्वसनीय साक्ष्यों की पुष्टि करें। केवल धुंधले दृश्यों, भ्रामक तस्वीरों या बिना प्रमाण वाले दावों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।

पहले भी हो चुका है प्रयास
इससे पहले भी एक ऐसे ही कुप्रयास में पाकिस्तान सोशल मीडिया हैंडल्स ने दावा किया था कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय जवानों की तलाशी ली जा रही है। हालाँकि यह दावा भी पूरी तरह से फर्जी पाया गया है। इसके लिए पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स ने किसी और स्थान के एक पुराने व भ्रामक वीडियो का सहारा लिया था।

 

 

 

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