फरीदाबाद। दयालपुर में एक बाप ने इकलौते मासूम की हत्या कर उसके शव को सीने से बांधकर खुद भी फंदा लगा लिया। वह नशा करने का आदी था और रोजाना झगड़ता था। इससे तंग आकर पत्नी-बेटा, माता-पिता और भाई पड़ोस के गांव की कॉलोनी में रहने लगे।
आरोपी पैतृक मकान में अकेला रहता था और मानसिक रूप से परेशान था। पत्नी और परिजनों लौटने के लिए कहता था। पुलिस का कहना है कि शायद इसी मानसिक पीड़ा से उसने ये काम किया। उसके पिता के अनुसार वह रूपचंद, पत्नी मंजू, बेटे भारत और सागर के साथ रह रहा था। भारत एक कंपनी में काम करता है और अविवाहित है। सागर पहले टैक्सी चलाता था, अब घरेलू गाड़ी पर ड्राइवर था। सागर ने नेहा से प्रेम विवाह किया था। विवाह के बाद नेहा ने लक्षित को जन्म लिया। पांच वर्षीय लक्षित नर्सरी में पढ़ रहा था। नेहा के अनुसार पति सागर नशा करता था। इस कारण उसका पत्नी, माता-पिता और भाई से झगड़ा रहने लगा। रोजाना कलह से तंग आकर रूपचंद ने परिवार सहित पैतृक मकान छोड़ दिया।
दो साल पहले रूपचंद पत्नी मंजू, बड़े बेटे भारत, बहू नेहा और पोते लक्षित को लेकर मच्छगर की एक काॅलोनी में रहने लगा। जबकि सागर उसी मकान में रह रहा था। उनके पड़ोसी ने बताया कि वह रविवार को अपने बेटे को यहां ले आता था। रविवार को भी ऐसा ही हुआ। दोपहर तीन बजे तक पड़ोसियों को लक्षित की खेलने की आवाज आती रही। इसके बाद बंद हो गई। शाम को 7:30 बजे नेहा ने उसे फोन लगाया। इसके बाद रात आठ बजे वह गांव वाले घर पहुंची तो दरवाजा बंद मिला। नेहा के कहने पर एक पड़ोसी मकान की छत पर चढ़ा। उसने देखा कि सागर फंदे पर है, जबकि लक्षित का शव उसके सीने से बंधा था।
पड़ोसी ने अंदर से दरवाजा खोला तो नेहा अंदर दाखिल हुई। उसने बेटे को पति के सीने से अलग किया। वह मर चुका था। गला और मुंह नीला था। नेहा का कहना है कि उसे इसका अंदाजा भी नहीं था। हर बार की तरह जब वह बेटे को लेकर गया था तो उसने कहा था कि शाम सात बजे तक छोड़ जाएगा। मुझे पता होता कि वह ऐसा कदम उठाएगा तो मैं बेटे को उसके साथ कभी नहीं भेजती।
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