नेशनल डेस्क: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन का 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। वह पिछले एक महीने से ब्रेन स्ट्रोक और किडनी से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे थे और वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे।
झारखंड आंदोलन की आत्मा माने जाने वाले शिबू सोरेन न सिर्फ एक राजनेता, बल्कि एक विचारधारा के प्रतीक थे। उन्हें ‘दिशोम गुरु’ के नाम से जाना जाता था एक ऐसा उपनाम जो उन्हें आदिवासी समाज के बीच उनके योगदान के लिए मिला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया ट्वीट
“शिबू सोरेन जी एक ज़मीनी नेता थे, जिन्होंने जनता के प्रति अटूट समर्पण के साथ सार्वजनिक जीवन में तरक्की की। वे आदिवासी समुदायों, गरीबों और वंचितों को सशक्त बनाने के लिए विशेष रूप से प्रतिबद्ध थे। उनके निधन से दुःख हुआ। मेरी संवेदनाएं उनके परिवार और प्रशंसकों के साथ हैं। झारखंड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी से बात की और संवेदना व्यक्त की। ओम शांति।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट किया, “शिबू सोरेन जी एक ज़मीनी नेता थे, जिन्होंने जनता के प्रति अटूट समर्पण के साथ सार्वजनिक जीवन में तरक्की की। वे आदिवासी समुदायों, गरीबों और वंचितों को सशक्त बनाने के लिए विशेष रूप से प्रतिबद्ध थे। उनके निधन से दुःख हुआ। मेरी संवेदनाएं उनके… pic.twitter.com/gQ44uUtSHH
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 4, 2025
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया ट्वीट
“झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के वरिष्ठतम नेताओं में से एक, श्री शिबू सोरेन जी, झारखंड के उन कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे जिन्होंने जीवन भर समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर आदिवासी समुदाय के अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए संघर्ष किया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट किया, “झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और देश के वरिष्ठतम नेताओं में से एक, श्री शिबू सोरेन जी, झारखंड के उन कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे जिन्होंने जीवन भर समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर आदिवासी समुदाय के अधिकारों और सशक्तिकरण के लिए संघर्ष किया।… pic.twitter.com/iZFSveRfeS
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 4, 2025
अस्पताल में जुटे बड़े नेता
उनकी बिगड़ती तबीयत की खबर मिलते ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में सर गंगा राम अस्पताल पहुंचकर उनका हालचाल जाना था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, जो उनके पुत्र भी हैं, लगातार अस्पताल में मौजूद रहे। परिवार और समर्थकों के लिए यह वक्त बेहद भावुक और कठिन रहा।
एक राजनीतिक यात्रा जिसने इतिहास बनाया
शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक थे। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत एक जनआंदोलन से की और धीरे-धीरे एक मजबूत संगठन खड़ा किया। वे तीन बार झारखंड के मुख्यमंत्री बने (2005, 2008, 2009), हालांकि उनका कोई भी कार्यकाल पूर्ण नहीं हो पाया। इसके बावजूद, उन्होंने हर बार झारखंड की राजनीति की दिशा तय की।
आदिवासी अधिकारों के सच्चे प्रहरी
उनकी सबसे बड़ी पहचान रही आदिवासी समुदाय के अधिकारों की लड़ाई। ‘धनकटनी आंदोलन’ जैसे अभियानों के ज़रिए उन्होंने महाजनों और साहूकारों के शोषण के खिलाफ आदिवासियों को एकजुट किया। 1980 से लेकर 2019 तक वे दुमका से सात बार लोकसभा सांसद रहे। वर्तमान में वे राज्यसभा के सदस्य थे।
झारखंड राज्य निर्माण में रहा अहम योगदान
झारखंड को बिहार से अलग कर एक स्वतंत्र राज्य बनाने की लंबी लड़ाई में शिबू सोरेन की भूमिका निर्णायक रही। उन्होंने जिस प्रकार JMM को एक सामाजिक आंदोलन से राजनीतिक ताकत में तब्दील किया, वह भारतीय राजनीति के इतिहास में विशेष स्थान रखता है।
शिबू सोरेन का निधन सिर्फ एक नेता की मृत्यु नहीं है, बल्कि एक आंदोलन, एक विचारधारा और एक संघर्षशील युग का अंत है। उनकी विरासत झारखंड की मिट्टी में हमेशा जीवित रहेगी हर उस किसान, आदिवासी और युवा में जो बदलाव की उम्मीद रखता है। उनकी अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार की जानकारी जल्द ही साँझा की जाएगी।