Last Updated: September 27, 2026

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नई दिल्ली पहुंचे फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों, एआई समिट में लेंगे हिस्सा

February 18, 2026

नई दिल्ली पहुंचे फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों, एआई समिट में लेंगे हिस्सा

नई दिल्ली । फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों बुधवार को फर्स्ट लेडी ब्रिजिट मैक्रों के साथ नई दिल्ली पहुंचे। हवाई अड्डे पर उनका एमओएस केवी सिंह ने स्वागत किया, और रिमझिम बरसात के बीच लोक कलाकारों की प्रस्तुति का मैक्रों ने हाथ जोड़कर धन्यवाद दिया।

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विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कुछ तस्वीरों के साथ एक पोस्ट में बताया कि एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में हिस्सा लेने आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का स्वागत एमओएस केपी सिंह ने किया। पोस्ट के मुताबिक ये सम्मेलन एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत-फ्रांस के संबंधों को और ताकत देने की कोशिश है।

राष्ट्रपति बनने के बाद मैक्रों चौथी बार भारत आए हैं। दौरे की शुरुआत उन्होंने मुंबई से की। इससे पहले वे मार्च 2018 में पहली बार भारत आए थे। इसके बाद वे सितंबर 2023 में जी20 शिखर सम्मेलन के लिए और जनवरी 2024 में गणतंत्र दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि आए थे। भारत और फ्रांस के बीच 1998 से ही रणनीतिक साझेदारी है। दोनों देश रक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में साथ काम करते हैं। यह दौरा भी इसी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

भारत और फ्रांस साल 2026 को ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन ईयर’ के रूप में मना रहे हैं। यह एक साल तक चलने वाली संयुक्त पहल है, जिसका मकसद दोनों देशों के बीच नई तकनीक, शोध और औद्योगिक नवाचार में सहयोग बढ़ाना है। इस इनोवेशन ईयर का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर है। भारत और फ्रांस मिलकर एक साझा एआई रोडमैप पर काम कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य जिम्मेदार और एथिकल एआई सिस्टम विकसित करना है।

पीएम मोदी ने मंगलवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुंबई में मुलाकात की थी। दोनों ने मुंबई में संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रधानमंत्री ने फ्रांस को भारत का विशेष साझेदार बताया और कहा कि दोनों देशों ने अपने रिश्तों को ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ लेवल तक अपग्रेड करने का फैसला किया है।

‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ का अर्थ है कि दोनों देश केवल व्यापार या हथियारों की खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि सुरक्षा, तकनीक, अंतरिक्ष, समुद्री इलाकों की सुरक्षा और बड़े वैश्विक मुद्दों पर साथ मिलकर काम करेंगे। इससे पहले दोनों देशों के बीच संबंध ‘स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ स्तर के थे। पार्टनरशिप साल 1998 में शुरू हुई थी।

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