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‘हमें गोली चलाने का पूरा अधिकार था’, पूर्व सेना प्रमुख नरवणे का विपक्ष को जवाब, कहा – किताब में…

General Naravane

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General Naravane: भारत-चीन सीमा विवाद को लेकर राजनीतिक और सैन्य हलकों में चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। इस बीच मनोज मुकुंद नरवणे ने एक इंटरव्यू में कई अहम मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी है और विपक्ष के आरोपों का सीधा जवाब दिया है।

‘सरकार पर भरोसा नहीं तो कोई दलील काम नहीं करेगी’
पूर्व सेना प्रमुख ने चीन के हाथों भारतीय जमीन खोने के विपक्षी दावों को खारिज करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति देश के प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और सेना प्रमुख पर भी भरोसा नहीं करता, तो फिर उसे कोई भी तर्क समझाना मुश्किल है। उनका यह बयान राजनीतिक बहस के बीच आया है, जहां सरकार की भूमिका पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं।

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तनाव के समय सरकार का पूरा समर्थन मिला
मनोज मुकुंद नरवणे ने इस धारणा को भी नकार दिया कि चीन के साथ तनाव के चरम के दौरान उन्हें सरकार ने अकेला छोड़ दिया था। उन्होंने साफ कहा कि उस समय उन्हें सरकार का पूरा समर्थन मिला और सैन्य निर्णय लेने में कोई बाधा नहीं थी।

‘जरूरत पड़ती तो गोली चलाने की पूरी छूट थी’
नरवणे ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय सैनिकों को अपनी सुरक्षा के लिए गोली चलाने का पूरा अधिकार था। उन्होंने कहा कि आदेश बिल्कुल साफ थे, अगर हालात बिगड़ते और सैनिकों की जान खतरे में होती, तो वे कार्रवाई कर सकते थे।

किताब को लेकर विवाद पर सफाई
यह बयान उस विवाद के बाद आया है, जिसमें राहुल गांधी ने दावा किया था कि नरवणे की अप्रकाशित किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ में यह संकेत मिलता है कि पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे स्थित रेचिन ला दर्रे पर तनाव के दौरान उन्होंने सरकार से निर्देश मांगे थे।

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इस पर नरवणे ने कहा कि उनकी किताब में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिसे लेकर इतना विवाद खड़ा किया जाए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अलग-अलग लोगों की सोच अलग हो सकती है। सैन्य, कूटनीतिक और राजनीतिक नजरिए स्वाभाविक रूप से अलग होते हैं।

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