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सोना ही नहीं, अब चांदी में भी होगा ये बड़ा बदलाव,1 सितंबर से लागू होगा नया नियम

नई दिल्ली: सरकार ने सोने की हॉलमार्किंग में सफलता के बाद अब चांदी के आभूषणों और बर्तनों में भी पारदर्शिता और शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। 1 सितंबर 2025 से चांदी की ज्वेलरी पर भी अब 6 अंकों वाला HUID (Hallmark Unique Identification) कोड अनिवार्य कर दिया गया है। यह कोड न केवल चांदी की शुद्धता की पहचान करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि उसकी जांच किस हॉलमार्किंग सेंटर में की गई है।

क्या है नया HUID कोड?

अब तक चांदी में सिर्फ हॉलमार्क ग्रेडिंग होती थी, लेकिन उसमें कोई यूनिक पहचान नहीं होती थी। नए नियमों के तहत हर हॉलमार्क की गई चांदी की ज्वेलरी पर 6 डिजिट का यूनिक कोड होगा। यह कोड ग्राहक को उसकी खरीदी हुई वस्तु की शुद्धता, जांच केंद्र और ग्रेड की जानकारी देगा। यह सिस्टम सोने की तरह ही लागू किया जा रहा है, जिससे गहनों की शुद्धता पर कोई संदेह न रहे।

मिलावट पर लगेगी लगाम

चांदी के आभूषणों में कैडमियम जैसी धातुओं की मिलावट की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। यह एक कैंसरकारी तत्व है, जिसे मिलाकर नकली चांदी बनाई जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर चांदी में तांबे की मिलावट होती है तो वह हॉलमार्किंग के योग्य होती है, लेकिन कैडमियम की मिलावट होने पर हॉलमार्क नहीं किया जा सकता। नए नियम से इस तरह की मिलावट पर शिकंजा कसेगा।

क्या चांदी का काला पड़ना मिलावट की निशानी है?

इस सवाल पर इंडियन एसोसिएशन ऑफ हॉलमार्किंग सेंटर्स के अध्यक्ष उदय गजानन शिंदे ने बताया कि चांदी एक बेहद संवेदनशील धातु है। हवा, नमी और सल्फर के संपर्क में आने से यह काली पड़ सकती है, लेकिन अगर टूथपेस्ट या सफाई से यह कालापन दूर न हो, तो समझा जा सकता है कि उसमें अशुद्धता है।

हॉलमार्किंग में अभी भी कुछ कमियां

हालांकि नई व्यवस्था में अभी कुछ तकनीकी चुनौतियाँ बनी हुई हैं। फिलहाल HUID कोड से यह जानकारी नहीं मिलेगी कि वह गहना किस ज्वेलर से खरीदा गया है या उसका असली वजन कितना है। इसके अलावा एक बड़ी समस्या यह है कि एक बार कोड जनरेट हो जाने के बाद, कुछ लोग लेज़र मशीन से इसे किसी और गहने पर एंबॉस कर सकते हैं। इससे कोड की डुप्लीकेसी और दुरुपयोग की संभावना बनी रहती है।

आगे हो सकती है अनिवार्य

फिलहाल चांदी पर हॉलमार्किंग स्वैच्छिक है यानी यह ज्वेलर्स पर निर्भर करेगा कि वे इसे अपनाते हैं या नहीं। लेकिन सरकार आने वाले समय में इसे सोने की तरह अनिवार्य बना सकती है। शिंदे के अनुसार, देश में अभी सिल्वर हॉलमार्किंग के लिए पर्याप्त इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है। इसके लिए अलग मशीनरी और लाइसेंस की जरूरत होती है, जिसकी लागत 15-20 लाख रुपये तक हो सकती है।

सोने में हॉलमार्किंग से हुआ फायदा

सोने के मामले में जहां-जहां हॉलमार्किंग अनिवार्य की गई, वहां ज्वेलरी कारोबार में वृद्धि देखने को मिली है। इससे ग्राहक को शुद्धता की गारंटी मिलती है और बाजार में विश्वास बढ़ता है। देश में अब तक लगभग 75% गोल्ड ज्वेलरी पर हॉलमार्किंग हो रही है। इसी तर्ज पर अगर चांदी की हॉलमार्किंग भी लागू की जाती है, तो यह ग्राहकों और ईमानदार कारोबारियों दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगी।

क्या हॉलमार्किंग से महंगी होगी चांदी?

नहीं। हॉलमार्किंग की फीस सिर्फ 45 रुपये है, जो जीएसटी मिलाकर 51 रुपये होती है। चांदी की मौजूदा कीमत करीब 1 लाख रुपये प्रति किलो है, ऐसे में यह राशि नाममात्र है और इससे गहनों की कीमत पर कोई विशेष असर नहीं पड़ेगा।

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