Site icon Dainik Savera Times

इलाज के साथ रोकथाम पर भी सरकार का जोर, स्वास्थ्य क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा भारत : राजनाथ सिंह

rajnath singh

rajnath singh

लखनऊः रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के दीक्षांत समारोह में कहा कि सरकार का ध्यान केवल बीमारियों के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी रोकथाम पर भी समान रूप से केंद्रित है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था अधिक आत्मनिर्भर, सुलभ, किफायती, आधुनिक और जन-केंद्रित बनी है तथा चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। इस दौरान उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव आया है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल 17 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि अब उनकी संख्या बढ़कर 81 हो गई है। इसके अलावा प्रदेश में दो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भी संचालित हैं। उत्तर प्रदेश अब ‘हर जिले में मेडिकल कॉलेज’ की अवधारणा से भी आगे बढ़ चुका है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता तभी बेहतर हो सकती है, जब पर्याप्त संख्या में डॉक्टर और विशेषज्ञ उपलब्ध हों। इसी उद्देश्य से सरकार ने चिकित्सा शिक्षा का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है। उन्होंने कहा कि भारत आज जीन चिकित्सा, परमाणु चिकित्सा और अन्य अत्याधुनिक तकनीकों के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी वैश्विक चुनौतियों के स्वदेशी समाधान विकसित कर रहा है। कैंसर के इलाज में उपयोगी सीएआर-टी सेल चिकित्सा का दुनिया का सबसे सस्ता स्वरूप भारत ने विकसित किया है, जिससे यह उपचार अब आम लोगों की पहुंच में भी आ रहा है।

राजनाथ सिंह ने कहा कि देश चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। हीमोफीलिया के उपचार के लिए स्वदेशी जीन चिकित्सा का सफल परीक्षण किया जा चुका है। वहीं, पुणे के वैज्ञानिकों ने स्तन कैंसर के इलाज के लिए अत्याधुनिक नैनो औषधि विकसित की है। उन्होंने कहा कि तीन दशक बाद वर्ष 2024 में देश में पेनिसिलिन-जी का उत्पादन फिर शुरू हुआ है। उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के माध्यम से चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को भी नई गति मिली है। इसी वर्ष देश ने पहली स्वदेशी मैक्रोलाइड एंटीबायोटिक ‘नैफिथ्रोमाइसिन’ विकसित की है, जो जीवाणुजनित निमोनिया के इलाज में उपयोगी होगी।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने वर्ष 2023 में पहली स्वदेशी एमआरआई मशीन विकसित कर स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। देशभर में 19 हजार से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयां उपलब्ध कराई जा रही हैं। वहीं, आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों लोगों को निशुल्क इलाज की सुविधा मिल रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन हुए हैं।

सरकार का लक्ष्य केवल इलाज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि सभी नागरिकों के लिए सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करना है। राजनाथ सिंह ने अंगदान को मानवता का सबसे बड़ा उपहार बताते हुए कहा कि किसी व्यक्ति के अंग दूसरे व्यक्ति को नया जीवन दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि अंगदान को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों को दूर करने में डॉक्टरों की भूमिका सबसे अहम है और उनकी संवेदनशील सलाह कई परिवारों को इस दिशा में प्रेरित कर सकती है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता, कृत्रिम जीव विज्ञान, जीन संपादन और सटीक चिकित्सा जैसी नई तकनीक चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से बदलाव ला रही हैं। इसलिए डॉक्टरों को निरंतर नई जानकारी और तकनीकों से स्वयं को अपडेट रखना होगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि चिकित्सक अत्यंत तनावपूर्ण वातावरण में काम करते हैं, लेकिन उन्हें अपने स्वास्थ्य की भी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन बचाना सबसे बड़ा धर्म है और इसके लिए सबसे अधिक आवश्यकता संवेदनशीलता, सेवाभाव और दृढ़ संकल्प की होती है।

केजीएमयू ने देश को अनेक ऐसे चिकित्सक दिए हैं, जिन्होंने सेवा, समर्पण और उत्कृष्टता के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। उन्होंने नवस्नातक विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल डिग्री नहीं प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि चिकित्सा सेवा की गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बन रहे हैं। डॉक्टर का हर निर्णय केवल एक मरीज ही नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

Exit mobile version