grandmothers and great-grandmothers learn Bhangra : चंडीगढ़। इन दिनों भांगड़े का रंग ऐसा चढ़ रहा है कि उम्र की सीमाएं भी फीकी पड़ गई हैं। युवाओं से लेकर बुजुर्ग महिलाएं तक पंजाबी लोकनृत्य की धुनों पर थिरकने को उत्साहित हैं।
राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित भांगड़ा कलाकार बलकार सिंह सिद्धू की ओर से शुरू किया समर कैंप लोगों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता हासिल कर रहा है। महज 10 प्रतिभागियों से शुरू हुई यह पहल अब 100 से अधिक लोगों को भांगड़े की ताल पर जोड़ रही है, जहां फिटनेस, मनोरंजन और संस्कृति का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। 30 जून तक चलने होने वाले इस कैंप में काफी संख्या में लोग हिस्सा ले रहे हैं। डांस सीखने वालों में ज्यादातर महिलाएं हैं। उनका कहना है कि डांस करके एक तरफ वो फिट हो रही हैं। दूसरी लोगों की पॉजिटिव वाइब से उनकी थकान और मनासिक तनाव भी दूर हो रहा है। इससे उनको काफी फायदा मिल रहा है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में महिलाएं यहां डांस सीखने के लिए आ रही हैं।
इस कैंप में हिस्सा लेने के लिए मामूली रजिस्ट्रेशन फीस लगती है। इसके बाद हर शाम को लोग डांस सीखते हैं। कैंप में बच्चों के साथ बड़ी संख्या में सीनियर सिटीजन्स हिस्सा ले रहे हैं। कोई 60 वर्ष का है तो कोई 70 का। कुछ प्रतिभागी इससे भी अधिक उम्र के हैं, लेकिन जब ढोल बजता है, तो सभी उम्र का अंतर भूलकर भांगड़े की ताल में खो जाते हैं। इसके साथ ही महिलाएं जो पूरा दिन घर का काम करके थक जाती हैं। उनके लिए भी इस क्लास को लगाने का पूरा दिन इंतजार किया जाता है। (grandmothers and great-grandmothers learn Bhangra)
कैंप में शामिल महिलाएं कहती हैं कि सेवानिवृति के बाद उनके पास समय था। जब उन्होंने भांगड़ा कैंप की बात सुनी तो यहां आना शुरू किया। अब उनकी दिनचर्या बदल गई, बल्कि नए दोस्त भी बन गए और स्वास्थ्य में भी सुधार महसूस हो रहा है। युवा महिला जिसकी अभी शादी हुई है उनका कहना है कि भांगड़ा सिर्फ एक लोक नृत्य नहीं है, बल्कि इससे पूरे शरीर की एक्सरसाइज भी होती है। इसमें हाथ, पैर, कंधे और कमर सभी सक्रिय रहते हैं। इससे शरीर चुस्त रहता है, मानसिक तनाव कम होता है और व्यक्ति खुद को अधिक ऊर्जावान महसूस करता है।
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