नेशनल डेस्क: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अगुवाई में हुई जीएसटी काउंसिल ने आम जनता को बड़ी राहत दी है। बता दें कि अब चार स्लैब्स की जगह सिर्फ पांच और 18% के दो ही जीएसटी स्लैब्स होंगे। इसी के साथ ही भारत में जरूरी सामानों से टैक्स को पूरी तरह से हटा दिया गया है। आठ वर्षों के सबसे बड़े टैक्स रिफॉर्म की नींव उस वक्त रखी गई, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को एक सीधी पर प्रभावशाली हिदायत दी। “एक बार आप जीएसटी देख लो…”
इस साधारण से संवाद ने भारत की जीएसटी प्रणाली में व्यापक बदलाव की शुरुआत कर दी। अब तक चार टैक्स स्लैब्स में बंटे जीएसटी ढांचे को दो प्रमुख स्लैब्स 5% और 18% में समाहित कर दिया गया है। इसके साथ ही आवश्यक वस्तुओं को टैक्स मुक्त कर आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी गई है।
नरेंद्र मोदी की ‘विजनरी’ पहल
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह बदलाव किसी एक बैठक का परिणाम नहीं था, बल्कि यह एक लंबे विमर्श और गहन समीक्षा प्रक्रिया का नतीजा है। जब 2024 के अंत में जैसलमेर में जीएसटी काउंसिल की बैठक की तैयारियां चल रही थीं, उसी दौरान प्रधानमंत्री ने सीतारमण को फोन कर कहा “रेट्स को लेकर इतना कन्फ्यूजन क्यों है? कारोबारियों को राहत मिलनी चाहिए।”
इसी बातचीत के बाद वित्त मंत्री ने मंत्रालय को मौजूदा ढांचे की खामियों की गहन पड़ताल करने का निर्देश दिया। फिर बजट 2025-26 की तैयारियों के दौरान पीएम मोदी ने दोबारा पूछा, “आप जीएसटी पर काम कर रही हैं ना?” इसने स्पष्ट कर दिया कि यह सिर्फ एक आर्थिक सुधार नहीं, बल्कि राजनीतिक प्राथमिकता भी है।
GoM की भूमिका और केंद्र का नेतृत्व
वित्त मंत्री ने बताया कि दिसंबर 2024 से मई 2025 तक एक व्यापक अध्ययन और समीक्षा का दौर चला। छह राज्यों के मंत्रियों के समूह (GoM) को केंद्र सरकार के प्रस्ताव से अवगत कराया गया, जिसमें टैक्स रेट्स को तर्कसंगत बनाने और टैक्स स्ट्रक्चर को सरल करने की बात कही गई थी। बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और पूर्व में कर्नाटक के सीएम बोम्मई जैसे नेताओं की अध्यक्षता में GoM ने इन प्रस्तावों का विश्लेषण किया।
वित्त मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का यह प्रस्ताव पूरी तरह से GoM के कार्यों के आधार पर नहीं, बल्कि स्वतंत्र रूप से विकसित किया गया था, जो काउंसिल के सामने प्रस्तुत किया गया।
व्यवसायों के लिए राहत और डिजिटल तैयारियों पर जोर
इस रिफॉर्म का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह था कि छोटे और मझोले कारोबारों को अधिक सहूलियत मिले। सीतारमण ने इस पर विशेष ध्यान दिया कि “कोई भी रिफॉर्म सिर्फ आंकड़ों तक सीमित न रहे, बल्कि व्यावहारिक रूप से व्यापारियों के लिए आसान हो।”
साथ ही, बैकएंड इंफ्रास्ट्रक्चर को भी पूरी तरह से अपग्रेड किया गया, जिससे नया टैक्स स्ट्रक्चर सुचारु रूप से लागू हो सके। तकनीकी बदलावों से लेकर GSTN पोर्टल पर किए गए सुधारों तक, हर पहलू को बारीकी से जांचा गया।