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Haryana News : स्थानीय निकाय चुनाव : कम मतदान बिगाड़ेगा समीकरण, परिणाम 13 को

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अंबाला। प्रदेश में 10 मई को संपन्न हुए स्थानीय निकाय चुनाव में कम मतदान भाजपा-कांग्रेस समेत कई सियासी दलों का समीकरण बिगाड़ सकता है। कल तीन नगर निगमों अंबाला, सोनीपत और पंचकूला के चुनावों में मतदाताओं ने कम रुचि दिखाई। जबकि माना जा रहा था कि ये चुनाव ही आगे की राजनीति तय करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

कम और ज्यादा मतदान के मायने

अधिकतर शुरू से ही मतदान का कम होना ये माना जाता है कि मतदाता वर्तमान सरकार से संतुष्ट हैं। इसके विपरीत अपेक्षा से अधिक मतदान सरकार बदलने का काम करता है। जैसा कि हाल ही में पश्चिम बंगाल के चुनावों में देखने को मिला। यहां मतदान अधिक हुआ और मतदाताओं ने सरकार को बदल दिया। अब ये मतदान कितना प्रभावी होगा ये 13 मई को हम सबके सामने होगा।

बुधवार दोपहर तक होगी तस्वीर साफ

बुधवार सुबह मतगणना शुरू होगी जिसके बाद दोपहर तक नतीजे सामने आ जाएंगे। रविवार को मतदान खत्म होने के बाद से ही प्रत्याशियों ने समर्थकाें के साथ स्ट्रांग रूम के बाहर डेरा डाला हुआ है, जिससे कि किसी भी तरह की गड़बड़ी की कोई आशंका न रहे। पंचकूला में सोमवार को सेक्टर-14 स्थित राजकीय महिला महाविद्यालय में बनाए स्ट्रांग रूम में सीसीटीवी करीब एक घंटा 50 मिनट तक बंद रहने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस विधायक चंद्रमोहन और अन्य प्रत्याशियों ने हंगामा भी किया।

अपने-अपने नेता अपनी-अपनी दावेदारी

बता दें कि इस बार मतदान भले ही कम हुआ हो, लेकिन प्रत्याशियों और उनके समर्थकों के दावे कम नहीं हो रहे। अंबाला निगम में केवल 54.3, पंचकूला नगर निगम में 53.4 और सोनीपत में 48.2 प्रतिशत मतदान हुआ है। इसका मतलब ये निकाला जा सकता है कि मतदान में रुचि न दिखाते हुए केवल आधे लोगों ने ही अपनी जिम्मेदारी को निभाया। इसके विपरीत रोहतक की सांपला नगर पालिका में 79.2, हिसार की उकलाना नगर पालिका में 75.7 और रेवाड़ी नगर परिषद और धारूहेड़ा नगर पालिका में 66.2 प्रतिशत मतदान हुआ। यहां जो उत्साह मतदाताओं ने दिखाया उससे अधिक उत्साह प्रत्याशियों में नजर आ रहा है।

नेताओं की सक्रियता भी दरकिनार

ये पहला मौका था जब स्थानीय निकाय चुनावों में राज्य स्तर के नेताओं ने सक्रियता दिखाई। इस बार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा सांसद और अलग-अलग दलों के प्रदेशाध्यक्ष सक्रिय नजर आए। इनेलो की ओर से अभय चौटाला और सुनैना चौटाला भी सक्रिय नजर आए। इसके बावजूद मतदाताओं की मतदान के प्रति दिखाई बेरुखी कई सवाल खड़े करती है। नगर निगमों में कम मतदान प्रतिशत को मतदाताओं की बेरुखी से ही जोड़कर देखा जा रहा है।

विधानसभा रण के डेढ़ साल बाद थे चुनाव

विधानसभा चुनाव के डेढ़ साल बाद पहली बार निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस को अपनी ताकत परखने का मौका मिला है। भाजपा ने मेयर और परिषद-पालिकाओं के अध्यक्ष पद के लिए सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारे, जबकि कांग्रेस ने तीन नगर निगमों और रेवाड़ी नगर परिषद और धारुहेड़ा नगर पालिका में चुनाव लड़ा। इनेलो ने पंचकूला और सोनीपत और आम आदमी पार्टी ने सिर्फ पंचकूला में प्रत्याशी चुनावी रण में उतारे। बता दें कि अधिकतर स्थानों पर मुकाबला भाजपा और कांग्रेस में ही था।

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