कैथल: एंटी करप्शन ब्यूरो ने जनस्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सहित तीन कर्मचारियों को 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि करीब 35 लाख रुपए के लंबित बिल पास करने के एवज में यह रिश्वत मांगी गई थी। गांव क्योडक निवासी विशाल ने एंटी करप्शन ब्यूरो को शिकायत दी थी कि उसने जनस्वास्थ्य विभाग में पेंट, लीकेज ठीक करने सहित कई काम किए थे, लेकिन इन कार्यों के बिल कई वर्षों से लंबित पड़े हैं।
विशाल का आरोप है कि उसके वर्ष 2016 के किए गए काम के दस्तावेज भी उनके पास पड़े हैं। उनको लीक करके ब्लैकमेल करते आ रहे हैं। जब भी वह अपने बिल पास कराने के लिए विभाग के डिप्टी सुपरिटेंडेंट कमल कांत के पास जाता था तो उससे पैसों की मांग की जाती थी। उसे ब्लैकमेल करने में कलायत का एक आरटीआई कार्यकर्ता भी शामिल है। इसके अधिकारियों की मिलीभगत है। लगातार हो रही मांग और बिलों के लटकने से परेशान होकर उसने इसकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो में कर दी।
शिकायत के आधार पर एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने जाल बिछाया। योजना के तहत शुक्रवार को विशाल को 30 हजार रुपए लेकर जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यालय भेजा गया। तय योजना के अनुसार विशाल ने डिप्टी सुपरिटेंडेंट कमल कांत को 20 हजार रुपए तथा हरियाणा कौशल रोजगार निगम के तहत लगे ड्राफ्ट्समैन अशोक को पांच-पांच हजार रुपए दिए। अशोक ने कंप्यूटर आपरेटर बलजीत के नाम से पैसे लिए।
जैसे ही आरोपियों ने रिश्वत की राशि ली, पहले से सतर्क एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम ने मौके पर दबिश देकर तीनों को पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद विभाग में हडकंप मच गया। बताया जा रहा है कि पकड़े जाने के बाद डिप्टी सुपरिटेंडेंट कमलकांत भावुक हो गए और खुद को गलत तरीके से फंसाए जाने की बात कहते नजर आए।

