करनाल : प्रॉपर्टी आईडी में नाम की गलती ठीक कराने के बदले ₹5 हजार की रिश्वत मांगना नगर निगम के एक क्लर्क को भारी पड़ गया। हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने मंगलवार सुबह क्लर्क गौरव राणा को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। कार्रवाई के दौरान आरोपी के हाथों पर केमिकल पाउडर के निशान भी मिले।
एक सप्ताह से कार्यालय के चक्कर लगा रहा था शिकायतकर्ता:
जानकारी के अनुसार करनाल निवासी कुलदीप अपनी प्रॉपर्टी आईडी में हुई गलती ठीक कराने के लिए करीब एक सप्ताह से नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगा रहा था। आरोप है कि इसी दौरान उसकी मुलाकात क्लर्क गौरव राणा से हुई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि नाम ठीक करने के बदले क्लर्क ने उससे ₹5 हजार की रिश्वत मांगी। इसके बाद कुलदीप ने मामले की शिकायत ACB को दी। शिकायत के आधार पर टीम ने ट्रैप की कार्रवाई की तैयारी की।
केमिकल लगे नोट देकर बिछाया जाल:
ACB टीम ने रिश्वत के लिए दिए जाने वाले ₹5 हजार के नोटों पर केमिकल पाउडर लगाया और उनके नंबर भी दर्ज किए। इसके बाद शिकायतकर्ता को वही नोट देकर आरोपी के पास भेजा गया। बताया गया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता को नगर निगम कार्यालय के बजाय करनाल के पुराने बस स्टैंड पर बुलाया था। मंगलवार सुबह करीब 9 बजे कुलदीप वहां पहुंचा और आरोपी को रिश्वत की रकम दी। रकम लेते ही पहले से मौजूद ACB टीम ने उसे दबोच लिया।
कार्यालय में रेड के डर से बस स्टैंड पर बुलाया:
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी ने रिश्वत लेने के लिए नगर निगम कार्यालय से बाहर मिलने की योजना बनाई थी। बताया जा रहा है कि कार्यालय में सीसीटीवी कैमरों और ACB की कार्रवाई के डर के चलते शिकायतकर्ता को पुराने बस स्टैंड पर बुलाया गया।
पहले नगर निगम कार्यालय, फिर ACB कार्यालय ले गई टीम:
गिरफ्तारी के बाद ACB टीम आरोपी क्लर्क को नगर निगम कार्यालय लेकर पहुंची। इसके बाद उसे ACB कार्यालय ले जाया गया, जहां उससे पूछताछ की जा रही है। टीम मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और संभावित संलिप्तता की भी जांच कर रही है। ACB इंस्पेक्टर अरविंद कुमार के नेतृत्व में कार्रवाई की गई। वहीं ACB के DSP सतीश कुमार ने बताया कि शिकायतकर्ता की सूचना पर टीम ने ट्रैप लगाया था और पैसे लेते ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी मूल रूप से कैथल का रहने वाला बताया गया है। ACB की कार्रवाई के बाद नगर निगम में रिश्वत के आरोपों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

