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महेंद्रगढ़ में बढ़ा वायु प्रदूषण, सभी छह स्थानों पर AQI 200 पार

Delhi Air Pollution

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Air Quality Deteriorates Across Mahendragarh, AQI Crosses 200 : महेंद्रगढ़। वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक होती जा रही है। शुक्रवार शाम जिले के सभी छह स्थानों पर एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 200 से अधिक दर्ज किया गया। नांगल चौधरी 223 AQI के साथ सबसे प्रदूषित क्षेत्र रहा, जबकि सतनाली में 205 AQI दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों ने बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

इसका सीधा असर आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार शुक्रवार शाम 3:45 बजे महेंद्रगढ़ जिले के सभी छह स्थानों पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 200 से अधिक दर्ज किया गया। आंकड़ों के अनुसार नारनौल में 208, अटेली में 216, महेंद्रगढ़ में 218, कनीना में 221, नांगल चौधरी में 223 तथा सतनाली में 205 AQI दर्ज किया गया। इनमें नांगल चौधरी में सर्वाधिक 223 और सतनाली में सबसे कम 205 AQI रहा। यह स्थिति जिले में वायु गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ाने वाली है। प्रोफेसर डॉ. चंद्रमोहन, नोडल अधिकारी, भारतीय मौसम विभाग सब-सेंटर, राजकीय महाविद्यालय नारनौल ने बताया कि हरियाणा एनसीआर और दिल्ली के वातावरण में प्रदूषण की समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है।

इसका प्रभाव महेंद्रगढ़, नारनौल, रेवाड़ी, गुरुग्राम, फरीदाबाद, झज्जर, भिवानी तथा आसपास के क्षेत्रों में भी देखने को मिल रहा है। वायु में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म प्रदूषक कण मानव स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से हानिकारक हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि मौसम की परिस्थितियां भी प्रदूषण को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती हैं। हवा की गति कम होने, तापमान में गिरावट और वायुमंडलीय स्थिरता के कारण प्रदूषक कण वातावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं। सर्दियों में ऐसी परिस्थितियां प्रदूषण की समस्या को और गंभीर बना देती हैं। डॉ. चंद्रमोहन ने आमजन से अपील की कि प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर अनावश्यक रूप से खुले वातावरण में जाने से बचें।

विशेषकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा सांस और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। सुबह और शाम के समय बाहरी गतिविधियों को सीमित रखें। जरूरत पड़ने पर अच्छी गुणवत्ता वाले N95 मास्क का प्रयोग करें तथा घरों में धूल और धुएं के प्रवेश को कम करने के उपाय अपनाएं। उन्होंने कहा कि वायु प्रदूषण केवल पर्यावरण से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह जनस्वास्थ्य, जैव विविधता और पारिस्थितिक संतुलन के लिए भी गंभीर चुनौती है। स्वच्छ हवा प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इसके संरक्षण की जिम्मेदारी समाज के हर व्यक्ति की है।

डॉ. चंद्रमोहन ने नागरिकों से खुले में कचरा और पत्तियां नहीं जलाने, निजी वाहनों की बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपाय अपनाने तथा अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की। उन्होंने कहा कि हरित क्षेत्रों का संरक्षण भी प्रदूषण नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वायु प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान केवल प्रशासनिक प्रयासों से संभव नहीं है। इसके लिए जनभागीदारी, पर्यावरण के प्रति जागरूकता और सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी है। यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएं तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, स्वस्थ और सुरक्षित पर्यावरण उपलब्ध कराया जा सकता है।

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