अंबाला के कर्मभूमि एक्सप्रेस से बरामद किए गए दस बच्चों में से छह बच्चों को शुक्रवार को उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया। जिला बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश होने के बाद परिजनों की काउंसलिंग की गई। समिति ने साफ चेतावनी दी कि बच्चों को बाल मजदूरी में धकेलने की गलती दोबारा न हो, बल्कि उन्हें शिक्षा दिलाकर उनका भविष्य संवारा जाए।
बच्चों को सौंपने से पहले परिजनों से शपथ पत्र भी लिया गया। इसमें स्पष्ट किया गया कि यदि आगे कभी बच्चे को मजबूरन काम में लगाया गया तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। इस कदम का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना और उन्हें सही दिशा में बढ़ावा देना है।
वहीं, शेष चार बच्चों को अभी छावनी स्थित बाल भवन में ही रखा गया है। समिति ने स्पष्ट किया कि इन बच्चों को तभी परिजनों को सौंपा जाएगा, जब उनके अभिभावक सामने आएंगे और समिति की शर्तों को पूरा करेंगे। तब तक वे पूरी देखरेख में वहीं रहेंगे।
पूछताछ के दौरान बच्चों ने अपने-अपने अलग-अलग बयान दिए। किसी बच्चे ने कहा कि वह अमृतसर माथा टेकने जा रहा था, तो किसी ने दावा किया कि वह दरगाह पर चादर चढ़ाने के लिए निकला था। अलग-अलग जानकारियों के चलते समिति ने इस मामले को गंभीरता से लिया और आगे भी निगरानी रखने की बात कही।
सीडब्ल्यूसी की चेयरमैन रंजीता ने कहा कि बच्चों को शिक्षा और संस्कारों की ओर मोड़ना ही असली जिम्मेदारी है। उन्होंने परिजनों को यह भी समझाया कि यदि बच्चों को मजबूरी में बाल मजदूरी की तरफ धकेला जाएगा तो उनका बचपन और भविष्य दोनों बर्बाद हो जाएंगे।

