Last Updated: October 13, 2026

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हरियाणा में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल गहरी, कई जिलों में इलाज ठप

December 10, 2025

हरियाणा में डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल गहरी, कई जिलों में इलाज ठप

पंचकूला। हरियाणा में सरकारी अस्पतालों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन (एचसीएमएसए) और सरकार के बीच मतभेद सुलझने की बजाय और तीखे हो गए हैं। मंगलवार को हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही, जिसके कारण पानीपत, जींद, हिसार, कैथल, यमुनानगर, फतेहाबाद, झज्जर और दादरी समेत कई जिलों में मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सेवाएँ नहीं मिल पाईं।

स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है, जिसके लागू होने के बाद अगले छह महीनों तक हड़ताल पर कानूनी रोक रहेगी।

एसोसिएशन का रुख और सख्त, आमरण अनशन की घोषणा

डॉक्टरों ने साफ कह दिया है कि जब तक उनकी माँगों पर ठोस समाधान नहीं निकलता, वे अनिश्चितकालीन हड़ताल से पीछे नहीं हटेंगे। ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक सभी सेवाएँ प्रभावित रहेंगी और बुधवार से आमरण अनशन शुरू करने की तैयारियाँ लगभग पूरी हो चुकी हैं। देर शाम कुरुक्षेत्र के चिकित्सकों ने आंदोलन से पीछे हटने का फैसला जरूर लिया, लेकिन प्रदेश स्तर पर गतिरोध अभी भी बरकरार है।

सरकार और प्रतिनिधियों के बीच वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी (एसएमओ) की प्रत्यक्ष भर्ती रोकने पर सहमति बनी है, लेकिन एश्योर्ड करियर प्रमोशन (एसीपी) को लेकर बातचीत अटकी हुई है।

एस्मा का मतलब क्या है?

एस्मा उन स्थितियों में लागू किया जाता है जहाँ जनता को मिलने वाली महत्वपूर्ण सेवाओं — जैसे स्वास्थ्य, बिजली, पानी, परिवहन या पेट्रोलियम — पर किसी प्रकार की रुकावट का खतरा हो।

कानून लागू होने के बाद सरकार के पास ऐसे किसी भी व्यवधान को रोकने तथा संबंधित कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करने की शक्ति होती है, जिसमें बिना वारंट गिरफ्तारी भी शामिल है।

यह प्रावधान अधिकतम छह महीने के लिए होता है और जरूरत पड़ने पर बढ़ाया भी जा सकता है। मरीजों की भीड़ बढ़ी, इलाज की सुविधा घटी
हड़ताल के दूसरे दिन अस्पतालों में स्थिति अधिक अव्यवस्थित दिखी:

पानीपत: सामान्य दिनों में करीब 1800 मरीज आते हैं, लेकिन मंगलवार को संख्या घटकर लगभग 1000 पर आ गई।
करनाल: सिविल अस्पताल में ओपीडी केवल 800 के आसपास रही।
यमुनानगर: लगभग 2000 मरीज पहुंच तो गए, लेकिन 62 डॉक्टर ड्यूटी पर नहीं थे।
फतेहाबाद: यहाँ भी ओपीडी का आँकड़ा लगभग 1000 के आसपास ही सिमटा रहा।
लंबी कतारों और सीमित सेवाओं के चलते कई मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों या अन्य जिलों में रुख करना पड़ा।

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