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10 साल से घर का इंतजार, अब ED की रेड से खुली साजिश

ED Raid Gurugram project

ED Raid Gurugram project

गुरुग्राम। एक दशक से अपने घर का सपना देख रहे सैकड़ों फ्लैट खरीदारों की पीड़ा अब जांच एजेंसियों की फाइलों में दर्ज हो चुकी है। दिल्ली-एनसीआर के एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट से जुड़ी इसी कहानी में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा कदम उठाते हुए कई ठिकानों पर छापेमारी की है, जिसमें करोड़ों के खेल और अंदरूनी मिलीभगत के संकेत सामने आए हैं।

ईडी की गुरुग्राम जोनल टीम ने यह कार्रवाई एंगल इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड, उससे जुड़े एक रेजोल्यूशन प्रोफेशनल और नौसेवा बिल्डवेल एलएलपी व उसके साझेदारों के ठिकानों पर की। तलाशी के दौरान एजेंसी ने करीब 33 लाख रुपये की नकदी और कई अहम डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं, जिनसे दिवाला प्रक्रिया के दौरान की गई कथित गड़बड़ियों का सुराग मिला है।

अधूरा प्रोजेक्ट, टूटा भरोसा

जांच की जड़ गुरुग्राम के सेक्टर-70 में स्थित कृष फ्लोरेंस एस्टेट नामक हाउसिंग प्रोजेक्ट है। करीब 14 एकड़ में विकसित होने वाला यह प्रोजेक्ट बीते 10 वर्षों से अधूरा पड़ा है। मौके पर केवल तीन टावर खड़े हैं, वह भी अधूरे। लंबे इंतजार और अनिश्चितता से परेशान होकर फ्लैट खरीदारों को आखिरकार दिवाला प्रक्रिया (सीआईआरपी) का रास्ता अपनाना पड़ा।

जमीन सस्ती, नुकसान भारी

ईडी की जांच में सामने आया है कि दिवाला प्रक्रिया शुरू होने से पहले करीब दो एकड़ जमीन मात्र 31 करोड़ रुपये में एमओयू के जरिए बेच दी गई, जबकि बाद में हुए मूल्यांकन में उसी जमीन की कीमत लगभग 160 करोड़ रुपये आंकी गई। इस अंतर ने पूरे सौदे की नीयत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सिस्टम के अंदर की मिलीभगत

जांच एजेंसी का दावा है कि सीआईआरपी के दौरान निष्पक्ष निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले रेजोल्यूशन प्रोफेशनल ने नियमों के विपरीत जाकर आरोपी प्रमोटरों को गोपनीय जानकारियां साझा कीं। तलाशी में मिले दस्तावेज और डिजिटल डेटा एनसीएलटी में दाखिल किए गए दावों से उलट पाए गए हैं, जिससे मिलीभगत के आरोप और गहरे हो गए हैं।

पहले ही हो चुकी है गिरफ्तारी

इस मामले में प्रमुख प्रमोटर अमित कात्याल को ईडी पहले ही 17 नवंबर 2025 को गिरफ्तार कर चुकी है। उसकी डिजिटल जांच में एक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को नुकसान पहुंचाने और होमबायर्स पर शिकायतें वापस लेने का दबाव बनाने जैसे तथ्य भी सामने आए हैं। ईडी का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क पुराने प्रमोटरों को को कानूनी कार्रवाई से बचाने और दिवाला कानून की प्रक्रिया को प्रभावित करने के इरादे से बनाया गया था। एजेंसी ने साफ किया है कि मामले में जांच अभी जारी है और आगे और खुलासे संभव हैं।

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