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गुरुग्राम में अंतरराष्ट्रीय गिरोह का पर्दाफाश, फर्जी जीपीए से दो प्लॉट हड़पने की साजिश

गुरुग्राम पुलिस ने मंगलवार को एक बड़े अंतरराष्ट्रीय ठगी मॉड्यूल का खुलासा किया है। गिरोह के सदस्यों पर आरोप है कि उन्होंने अमेरिका में रहने वाले एक एनआरआई दंपती के सेक्टर 31 स्थित दो प्लॉटों को हड़पने की योजना बनाई। इसके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार कर दंपती की पहचान बदलने की कोशिश की गई।

ठगों ने सबसे पहले दंपती का एक नकली बेटा तैयार किया, जिसके नाम पर फर्जी पासपोर्ट फ्रांस से बनवाए गए। इसके बाद स्विट्जरलैंड में एक जर्नल पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराई गई। एंबेसी के जरिये इस फर्जी जीपीए को भारत भेजकर कलेक्टर कार्यालय में रजिस्टर्ड कराया गया और फिर इसे एचएसवीपी की प्रॉपर्टी फाइल में भी लगवा दिया गया। सोमवार रात पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान लखविंदर सिंह, निवासी हयातपुर गांव, नवां शहर (पंजाब) के रूप में हुई है। पुलिस ने बताया कि लखविंदर को दिल्ली एयरपोर्ट से पकड़ा गया, जहां वह यूनाइटेड किंगडम से लौटा था। उसके खिलाफ गुरुग्राम पुलिस पहले ही लुकआउट सर्कुलर जारी कर चुकी थी, क्योंकि पकड़ से बचने के लिए वह 2022 में पत्नी के साथ यूके चला गया था।

यह मामला मूल रूप से 2022 में सामने आया था। एनआरआई विवेक भटनागर ने आर्थिक अपराध शाखा गुरुग्राम में शिकायत दी थी कि उनके सेक्टर 31 स्थित दोनों प्लॉट को बेचे जाने की कोशिश हो रही है। एक प्रॉपर्टी डीलर ने उन्हें कॉल कर बताया था कि उनके ‘बेटे’ करण भटनागर ने प्लॉट बेचने के लिए एडवांस लेकर सौदा तय कर दिया है। विवेक ने स्पष्ट कर दिया कि न तो उनका कोई बेटा है और न ही उन्होंने किसी को कोई अधिकार दिया है।

शिकायत पर जब आर्थिक अपराध शाखा ने जांच की, तो पता चला कि करण भटनागर नाम का व्यक्ति एचएसवीपी में जाकर वही प्रॉपर्टी लखविंदर सिंह के नाम ट्रांसफर करवा चुका था। डीलरों से मिली तस्वीरें भी फर्जी बेटे और लखविंदर की मिलीं। इसके बाद जनवरी 2023 में इस मामले में सदर थाने में केस दर्ज किया गया।

आगे की जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह नाम बदल-बदल कर इन प्लॉटों को बेचने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान पुलिस को पता चला कि घटना के मुख्य आरोपी लखविंदर सिंह विदेश भाग चुका है। उसकी तलाश में पुलिस ने कई छापेमारियां कीं लेकिन सफलता नहीं मिली, जिसके बाद लुकआउट सर्कुलर जारी कराया गया।

पुलिस के अनुसार शुरुआती पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि फर्जी जीपीए और फर्जी पहचान बनवाकर ही यह पूरी ठगी की गई थी। स्विट्जरलैंड और फ्रांस में तैयार कराए गए दस्तावेजों के आधार पर प्रॉपर्टी ट्रांसफर की प्रक्रिया की गई थी। आरोपी ने बताया कि 2021 और 2022 में वह इस प्रॉपर्टी को कई बार बेचने की कोशिश कर चुका था।

पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि आरोपी से रिमांड पर पूछताछ की जाएगी, ताकि गिरोह के बाकी सदस्यों कीपहचान की जा सके। पुलिस उम्मीद कर रही है कि जल्द ही बाकी आरोपी भी गिरफ्तार किए जाएंगे।

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