गुरुग्राम की सत्र न्यायाधीश वाणी गोपाल वर्मा ने ओशियन सेवन बिल्डटैक (ओएसबी समूह) प्राइवेट लिमिटेड के CEO संजीव कुमार की अग्रिम जमानत याचिका सोमवार शाम को खारिज कर दी। संजीव कुमार और अन्य अधिकारियों पर फ्लैट खरीदारों से धोखाधड़ी और जालसाजी करने के गंभीर आरोप हैं।
जानकारी के अनुसार, 14 मई को सेक्टर-50 पुलिस ने प्रबंध निदेशक स्वराज सिंह यादव, CEO संजीव कुमार, अधिकारी नवीन झा और एक अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की थी। शिकायतकर्ता अमित रस्तोगी का आरोप है कि आरोपियों ने उनसे निवेश के नाम पर 2.87 करोड़ रुपये लिए और 18 प्रतिशत वार्षिक लाभ का वादा किया।
रकम समय पर वापस न मिलने पर 2022 में समझौता किया गया कि सेक्टर-109 स्थित ओएसबी एक्सप्रेस वे टावर्स में मैनेजमेंट कोटे के सात फ्लैट खरीदारों को दिए जाएंगे। आरोप है कि बाद में बिल्डर ने इन यूनिट्स को बिना सहमति दूसरों के नाम ट्रांसफर कर दिया और विरोध करने पर धमकियां भी दीं।
गिरफ्तारी से बचने के लिए संजीव कुमार ने 3 सितंबर को अग्रिम जमानत याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान उन्होंने दावा किया कि वे पिछले साल CEO पद से इस्तीफा दे चुके हैं और इस मामले से उनका कोई संबंध नहीं है।
वहीं, एक्सप्रेस वे टावर्स बायर्स एसोसिएशन के अधिवक्ता मनीष शांडिल्य ने अदालत को बताया कि ओएसबी समूह ने करीब ढाई हजार फ्लैट खरीदारों से करोड़ों रुपये लेकर तीन रिहायशी परियोजनाएं अधूरी छोड़ दीं। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मामला गंभीर है और जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है।
गुरुग्राम के वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष शांडिल्य के अनुसार, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने भी ओएसबी समूह के मालिक स्वराज सिंह यादव के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज किए हैं, जिनमें संजीव कुमार का नाम भी शामिल है।

