चंडीगढ़: हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने आज कहा कि राज्य में बिजली वितरण और उपभोक्ता सेवाओं में तकनीकी क्रांति आई है।
राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या 81.92 लाख तक पहुंच गई है, जिनमें से 49.15 लाख उपभोक्ता अब अपने बिजली बिलों का भुगतान डिजिटल माध्यम से करते हैं। यह न केवल हरियाणा की डिजिटल साक्षरता को दर्शाता है, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए बढ़ी हुई सुविधा, पारदर्शिता और समय की बचत को भी दर्शाता है।
विज ने कहा कि हरियाणा में डिजिटल भुगतान का चलन तेजी से बढ़ रहा है। बिजली वितरण की जिम्मेदारी यूएचबीवीएन (उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम) और डीएचबीवीएन (दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम) के पास है। उनके कुल मासिक राजस्व का 60 प्रतिशत से अधिक अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्राप्त होता है।
शहरों और गांवों में उपभोक्ता नेट बैंकिंग, क्रेडिट/डेबिट कार्ड, आरटीजीएस, यूपीआई और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भुगतान कर रहे हैं। इससे न केवल बिलिंग प्रक्रिया में तेजी आई है, बल्कि लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत भी खत्म हो गई है।
उन्होंने कहा कि बिजली उपभोक्ताओं को अब सिर्फ़ बिल भुगतान ही नहीं, बल्कि कई तरह की सेवाएँ ऑनलाइन मिल रही हैं। नए कनेक्शन, लोड बढ़ाना/घटाना, नाम बदलना, शिकायत निवारण और मीटर ट्रांसफर जैसी सेवाएँ ऑनलाइन पोर्टल के ज़रिए उपलब्ध हैं। उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1912 पर भी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
गुरुग्राम में एक केंद्रीय ग्राहक सेवा केंद्र और पंचकूला और गुरुग्राम में कॉल सेंटर स्थापित किए गए हैं। पंचकूला केंद्र में सर्दियों में 80 और गर्मियों में 180 सीटें हैं, जिससे शिकायतों का त्वरित समाधान संभव हो जाता है।
विज ने कहा कि हरियाणा में तकनीकी सुधारों के तहत शहरी फीडरों पर स्वचालित मीटर रीडिंग (एएमआर) लागू की गई है।
इलेक्ट्रॉनिक मीटर रीडिंग सिस्टम ने मैनुअल हस्तक्षेप को कम किया है और बिलिंग पारदर्शिता में सुधार किया है। मानेसर और कुंडली जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में स्मार्ट ग्रिड सिस्टम का विस्तार किया गया है, जिससे बिजली आपूर्ति की विश्वसनीयता और गुणवत्ता में वृद्धि हुई है।
उन्होंने ‘म्हारा गांव-जगमग गांव’ योजना पर प्रकाश डाला, जिसने हरियाणा के ग्रामीण परिदृश्य को बदल दिया है। इस पहल के तहत 5,887 गांवों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की गई है। ग्रामीण उपभोक्ता भी अब डिजिटल सेवाओं का उपयोग कर रहे हैं, जिससे उनकी जीवनशैली में उल्लेखनीय सुधार आया है।
विज ने पिछले 13 वर्षों में एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (एटीएंडसी) घाटे में ऐतिहासिक कमी का उल्लेख किया। 2012-13 में यह घाटा 29.31 प्रतिशत था, जो अब जनवरी 2025 तक घटकर मात्र 10.52 प्रतिशत रह गया है। यूएचबीवीएन ने घाटा 35.60 प्रतिशत से घटाकर 9.38 प्रतिशत और डीएचबीवीएन ने 23.29 प्रतिशत से घटाकर 11.35 प्रतिशत कर दिया है। यह उपलब्धि स्मार्ट मीटरिंग, लाइन लॉस नियंत्रण, तकनीकी सुधारों और उपभोक्ता जवाबदेही में वृद्धि के कारण है।
उन्होंने बताया कि ट्रांसफार्मर खराब होने की दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है। 1997-98 में यह 30.45 प्रतिशत थी, जो अब 2024-25 में घटकर 4.74 प्रतिशत रह गई है।
भले ही ट्रांसफार्मरों की संख्या 1.46 लाख से बढ़कर 7.08 लाख हो गई हो, लेकिन खराब होने की दर में कमी बिजली वितरण प्रणाली के सुदृढ़ीकरण को साबित करती है। इस सफलता का श्रेय नियमित रखरखाव, समय पर मरम्मत, आधुनिक तकनीक और बेहतर निगरानी को जाता है। विज ने माना कि ऑनलाइन भुगतान बढ़ने के साथ ही साइबर धोखाधड़ी के मामले भी सामने आए हैं। उपभोक्ता कई बार फर्जी कॉल या लिंक का शिकार हो जाते हैं।
डिस्कॉम को इस तरह की धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतें मिलती रहती हैं। इस मुद्दे से निपटने के लिए डिस्कॉम द्वारा उपभोक्ताओं को जागरूक करने और मजबूत सुरक्षा उपायों की तत्काल आवश्यकता है। विज ने कहा कि हरियाणा के बिजली उपभोक्ता अब पूरी तरह से हाईटेक हो गए हैं।
डिजिटल सेवाओं, तकनीकी सुधारों और 24 घंटे बिजली आपूर्ति ने राज्य को ऊर्जा क्षेत्र में अग्रणी बना दिया है। आने वाले समय में स्मार्ट प्रौद्योगिकियों और नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने से यह प्रगति और तेज होगी।

