
चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरसा में असिस्टेंट डिस्ट्रिक्ट अटार्नी की कमी पर सवाल उठाए। संज्ञान लेते हुए कहा कि जब 22 न्यायिक अधिकारी कार्यरत हैं और उनके मुकाबले केवल 10 कानून अधिकारी उपलब्ध हैं, तो न्यायिक कार्य सुचारू रूप से कैसे चलेगा।
कोर्ट रूम में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि सरकार पर्याप्त संख्या में लॉ आफिसर्स की नियुक्ति नहीं कर रही है। सिरसा में कुल 22 अदालतें संचालित हो रही हैं, जबकि केवल 12 सरकारी वकील हैं, जिनमें से भी दो अंबाला में कार्यरत हैं। इस तरह से 10 अधिकारी ही उपलब्ध हैं, जो न्यायिक कार्यभार के मुकाबले बेहद कम हैं। अदालत ने संकेत दिया कि एडवोकेट जनरल कार्यालय में बड़ी संख्या में अधिकारी मौजूद हैं, लेकिन जिलों में तैनाती की स्थिति कमजोर है।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि वास्तविक काम केवल 20-25 प्रतिशत अधिकारियों की ओर से ही किया जा रहा है, जिससे संसाधनों के समुचित उपयोग पर भी सवाल खड़े होते हैं। मामले में अदालत ने हरियाणा के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे इस संबंध में विस्तृत हलफनामा दाखिल करें और स्पष्ट करें कि जिलों में पर्याप्त संख्या में कानून अधिकारियों की नियुक्ति क्यों नहीं की गई।
अदालत ने हरियाणा और पंजाब के मुख्य सचिवों को निर्देश दिए कि वे जिलेवार स्थिति स्पष्ट करते हुए अपने-अपने हलफनामे दाखिल करें। कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा सीधे तौर पर न्याय प्रशासन से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पर्याप्त संख्या में कानून अधिकारियों की अनुपलब्धता से मामलों की सुनवाई प्रभावित होती है और न्याय मिलने में देरी होती है, जो न्याय व्यवस्था के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई 15 दिनों बाद तय करते हुए दोनों राज्यों से विस्तृत जवाब मांगा है।
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