हरियाणा डेस्क: हरियाणा आज केवल औद्योगिक और कृषि क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और हरित विकास (ग्रीन डेवलपमेंट) के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। यदि विकास का अर्थ बेहतर सड़कें, मजबूत उद्योग और आधुनिक शहर हैं, तो अब उसका अगला चरण स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ परिवहन है। इसी सोच को साकार करने की दिशा में हाइड्रोजन ट्रेन एक ऐतिहासिक पहल के रूप में सामने आई है।
तीन दिन बाद 17 जुलाई को हरियाणा के जींद से शुरू होने वाली हाइड्रोजन ट्रेन केवल एक नई रेल सेवा नहीं है, बल्कि यह विकसित हरियाणा और विकसित भारत के संकल्प का प्रतीक होगी। यह ट्रेन संदेश होगी कि भारत अब केवल नई तकनीकों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि भविष्य की तकनीकों को अपनाने और विकसित करने वाला देश बन रहा है। आज पूरी दुनिया कार्बन उत्सर्जन कम करने और जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ रही है। ऐसे समय में हाइड्रोजन आधारित परिवहन व्यवस्था भारत को वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे ले जा सकती है। डीज़ल आधारित इंजनों की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेन प्रदूषण को लगभग समाप्त कर देती है। इससे केवल जलवाष्प (वॉटर वेपर) निकलती है, जिससे पर्यावरण सुरक्षित रहता है और वायु गुणवत्ता में सुधार होता है।

हरियाणा लंबे समय से देश के औद्योगिक, कृषि और परिवहन मानचित्र पर अग्रणी राज्य रहा है। अब हाइड्रोजन ट्रेन जैसी आधुनिक परियोजनाएं राज्य को ग्रीन मोबिलिटी का अग्रणी केंद्र बनाने की क्षमता रखती हैं। यह पहल केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे रोजगार, निवेश, तकनीकी अनुसंधान और नए उद्योगों के विकास के अवसर भी बढ़ेंगे। हाइड्रोजन ऊर्जा का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। यदि हरियाणा इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाता है, तो राज्य में हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण, परिवहन और रखरखाव से जुड़े अनेक नए उद्योग विकसित होंगे। इससे युवाओं के लिए उच्च तकनीकी रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और हरियाणा की नायब सैनी सरकार का लक्ष्य केवल नई ट्रेन चलाना नहीं है, बल्कि पूरे परिवहन तंत्र को पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। सड़क, रेल और औद्योगिक क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग से आने वाले वर्षों में कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निर्धारित वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो उत्सर्जन के राष्ट्रीय लक्ष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। विकसित हरियाणा का सपना केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं है। इसका अर्थ ऐसा राज्य बनाना है जहाँ आधुनिक तकनीक, स्वच्छ पर्यावरण, बेहतर परिवहन, मजबूत उद्योग और युवाओं के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। हाइड्रोजन ट्रेन इन सभी उद्देश्यों को एक साथ जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बन सकती है।
हरियाणा के लिए यह अवसर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राज्य पहले ही ऑटोमोबाइल, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। यदि हाइड्रोजन आधारित तकनीक का विस्तार होता है, तो हरियाणा ग्रीन इंडस्ट्री का राष्ट्रीय केंद्र बनने की दिशा में बड़ी छलांग लगा सकता है। आज आवश्यकता केवल तकनीक अपनाने की नहीं, बल्कि समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की भी है। हाइड्रोजन ट्रेन नई पीढ़ी को यह संदेश देती है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। आधुनिक भारत का विकास प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर ही संभव है।
वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में हरियाणा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है। यदि राज्य आधुनिक तकनीक, हरित ऊर्जा और नवाचार को इसी प्रकार अपनाता रहा, तो वह केवल देश का आर्थिक इंजन ही नहीं, बल्कि स्वच्छ और टिकाऊ विकास का भी राष्ट्रीय मॉडल बनेगा। हाइड्रोजन ट्रेन इस परिवर्तन की शुरुआत है। यह केवल रेल की नई पटरी पर दौड़ती हुई ट्रेन नहीं, बल्कि विकसित हरियाणा, आत्मनिर्भर भारत और स्वच्छ भविष्य की ओर बढ़ती नई सोच की तेज़ रफ्तार है। आने वाले वर्षों में यह पहल हरियाणा को हरित विकास, तकनीकी नवाचार और सतत प्रगति के नए शिखर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
लेखक: अरविंद सैनी
प्रदेश मीडिया प्रभारी
भाजपा-हरियाणा