कुरुक्षेत्र: ब्रम्हासरोवर के पावन तट पर 15 नवंबर से 5 दिसंबर तक चलने वाले अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव विलुप्त हुई लोक संस्कृति विरासत को संजोए और जीवंत रखने के लिए एक बड़ा मंच है। इतना ही नहीं देश प्रदेश से आए हुए लोक कलाकार अपने-अपने राज्यों की लोक संस्कृति से पर्यटकों को मंत्रमुग्ध करने का काम कर रहे है। इतना ही नहीं सिर पर पगड़ी हाथ में बीन और ढोल की थाप के साथ जब ब्रम्हासरोवर के पावन तट पर बीन का लहर बजता है तब सरोवर की लहरें भी अपने आप आकर्षित होती नजर आ रही है।
इस अद्भुत कला के आगे सरोवर सराबोर होकर अपने आप को इस लहरा के आगे समर्पित कर रहा है। धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र ब्रम्हासरोवर के तट पर 15 नवंबर से 5 दिसंबर 2025 तक चलने वाले अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में विभिन्न प्रदेशों से आए लोक लोक कलाकारों ने अपनी अद्भुत लोक कला से महोत्सव में चार चांद लगाने का काम किया है। इन लोक कलाकारों की अदभुत अनोखी लोक धुन पर पर्यटकों के साथ-साथ ब्रम्हासरोवर की लहरें भी लहरा कर स्वागत करती नजर आ रही है।

बीन बांसुरी, नगाड़े वादक, डेरू वादक और कच्ची घोड़ी, राजस्थानी लोक कला के साथ-साथ अन्य लोक कलाकारों ने महोत्सव में आने वाले पर्यटकों को नाचने पर मजबूर किया है। इस महोत्सव में युवाओं के साथ-साथ बुजरुग भी इन लोक कलाओं के आगे नतमस्तक होते नजर आ रहे है, महोत्सव में आने वाला प्रत्येक पर्यटक इन लोक कलाओं की धुनों पर नाचने को मजबूर हो रहा है तथा महोत्सव के रंगों को अपने आप में रंगने का काम कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दूसरे दिन ब्रम्हासरोवर के पावन तट पर हजारों की संख्या में पर्यटकों ने इन लोक कलाकारों की लोक कला को बहुत ही ज्यादा सराहा है। इस अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में ब्रम्हासरोवर की चारों परिधि में लोक सांस्कृतिक कला का रंग धर्मनगरी के साथ-साथ देश विदेशों में भी दिखाई दे रहा है। इसके साथ-साथ दिन-प्रतिदिन इस महोत्सव में आने वाले पर्यटकों की लोकप्रियता बढ़ती हुई नजर आ रही है। इस बार 21 दिन चलने वाले यह अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव विश्व के पटल पर अपनी एक अनोखी पहचान बनाएंगा।