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14 साल बाद भी झज्जर रेलवे स्टेशन बदहाल, यात्रियों को नहीं मूलभूत सुविधाएं

झज्जर। 14 साल बीत जाने के बाद भी झज्जर रेलवे स्टेशन की हालत में कोई सुधार नहीं हो पाया है। स्टेशन आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। ना तो यात्रियों के बैठने की उचित व्यवस्था है और ना ही पीने के पानी की सुविधा। स्टेशन से नाममात्र की ट्रेनें ही गुजरती हैं, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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रेलवे स्टेशन पर एक पुरुष, एक महिला और एक दिव्यांग के लिए शौचालयों का निर्माण तो किया गया है, लेकिन तीनों पर ताले लटके हुए हैं। इससे यात्रियों को शौच के लिए आसपास के खेतों में जाना पड़ता है। पेयजल की सुविधा के नाम पर कई टोंटियां लगी हैं, पर उनमें पानी नहीं आता। स्टेशन पर मात्र एक आरओ सिस्टम लगा है, जिससे पानी पीने के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं।

स्टेशन परिसर की दीवारें टूटी पड़ी हैं और प्लेटफार्म पर लगे शेड व टिकट काउंटर की ओर जाने वाली सीढ़ियां भी जर्जर अवस्था में हैं। टिकट काउंटर के सामने रखे बेंच भी टूटे पड़े हैं, जिससे यात्रियों को बैठने में असुविधा होती है।

रिजर्वेशन काउंटर बंद

कम आमदनी के कारण रेलवे ने झज्जर स्टेशन का रिजर्वेशन काउंटर बंद कर रखा है। अब यात्रियों को टिकट बुक करवाने के लिए रोहतक या बहादुरगढ़ जाना पड़ता है, या फिर ऑनलाइन रिजर्वेशन का सहारा लेना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने रिजर्वेशन काउंटर को दोबारा शुरू करने की मांग की है।

शाम होते ही छा जाता है अंधेरा

स्टेशन परिसर और बाहरी रास्तों की लाइटें भी लंबे समय से खराब पड़ी हैं। शाम ढलते ही पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। रेलवे स्टेशन की तरफ आने-जाने वाले दोनों मार्गों पर एक भी स्ट्रीट लाइट नहीं लगी है। यात्रियों को एक से दो किलोमीटर तक अंधेरे में पैदल चलना पड़ता है, जिससे अनहोनी का खतरा बना रहता है।

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