करनाल। करोड़ों रुपये के धान घोटाले को लेकर किसान भड़क गए। किसानों का कहना है कि जांच धीमी चल रही है। विभाग आरोपियों पर कार्रवाई से बच रहे हैं। इसी विरोध में भाकियू से जुड़े किसानों ने गुरुवार को काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया।
प्रदेशाध्यक्ष रतनमान ने आरोप लगाया कि सरकार ने जांच की जिम्मेदारी उन्हीं अधिकारियों को दे दी है, जिन पर घोटाले के आरोप लगे हैं। उन्होंने कहा कि यह काली जांच है और सच्चाई को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। अगर निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो आंदोलन पूरे प्रदेश में फैलाया जाएगा।
किसान सुबह जाट धर्मशाला में जुटे। रतनमान की अगुवाई में किसान पैदल मार्च करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां किसानों ने धान घोटाले की जांच में लापरवाही का विरोध किया। मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी कि पारदर्शी जांच न होने पर राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
रतनमान ने आरोप लगाया कि भ्रष्ट अधिकारियों को बचाया जा रहा है। उन्होंने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एसीएस डी. सुरेश पर भी गंभीर आरोप लगाए। कहा कि दोषियों को तुरंत निलंबित कर जेल भेजा जाए।
किसानों ने कहा कि उनकी मेहनत की कमाई पर अफसर, बिचौलिए और राजनीतिक लोग डाका डाल रहे हैं। अगर सरकार ने जल्दी कार्रवाई नहीं की तो किसान बड़े आंदोलन का फैसला करेंगे।
ज्ञापन में किसानों ने आंकड़े भी दिए। कहा कि इस साल धान की पैदावार 25–30 प्रतिशत कम हुई। इसके बावजूद धान की आमद में 18 लाख 22 हजार मीट्रिक टन की फर्जी बढ़ोतरी दिखाई गई। इसका मूल्य करीब 4 हजार करोड़ रुपये बैठता है। किसानों के अनुसार फर्जी गेट पास काटकर सरकार को भारी नुकसान पहुंचाया गया। मिलर्स और अधिकारियों की मिलीभगत से किसानों को एमएसपी से 200–300 रुपये प्रति क्विंटल कम भुगतान मिला।
किसानों ने कई मांगें उठाईं। इनमें हाईकोर्ट की निगरानी में जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर एफआईआर और एमएसपी के बकाया अंतर का तुरंत भुगतान शामिल

