Karnal Youth Dies in Australia Truck Collision : करनाल। जिस बेटे की घर वापसी का परिवार बेसब्री से इंतजार कर रहा था, उसी की मौत की खबर ने पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। हरियाणा के करनाल जिले के ब्याना गांव निवासी 24 वर्षीय तुषार कंबोज की ऑस्ट्रेलिया में सड़क हादसे में मौत हो गई।
परिवार बेटे के लौटने और उसकी शादी की तैयारियों में जुटा था। जनवरी 2027 में तुषार ने घर आने की बात कही थी, लेकिन इससे पहले ही एक भीषण सड़क हादसे ने उसकी जिंदगी खत्म कर दी। अब परिवार को उसके पार्थिव शरीर के भारत पहुंचने का इंतजार है। तुषार करीब चार साल पहले बेहतर भविष्य और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के सपने के साथ ऑस्ट्रेलिया गया था। बेटे को विदेश भेजने के लिए उसके पिता राकेश कुमार ने अपनी जमीन और पशुबाड़ा तक बेच दिया था। करीब 15 लाख रुपये खर्च करने के साथ उन्होंने कर्ज भी लिया, ताकि बेटा विदेश जाकर पढ़ाई कर सके और अपना भविष्य संवार सके।
परिवार को उम्मीद थी कि तुषार की मेहनत एक दिन उनके संघर्षों को खुशियों में बदल देगी, लेकिन एक हादसे ने सब कुछ उजाड़ दिया। तुषार के पिता राकेश कुमार पेशे से दर्जी हैं। उन्होंने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और बेटे को बेहतर भविष्य देने के उद्देश्य से उन्होंने काफी मुश्किलों के बीच पैसों का इंतजाम किया था। एक जनवरी 2022 को करीब 15 लाख रुपये खर्च कर तुषार को स्टडी वीजा पर ऑस्ट्रेलिया भेजा गया था। तुषार ने 12वीं तक पढ़ाई की थी। ऑस्ट्रेलिया पहुंचने के बाद वह पढ़ाई के साथ ट्रक चलाने का काम भी करने लगा। पिता को भरोसा था कि बेटा विदेश में मेहनत करके परिवार की आर्थिक परेशानियां दूर करेगा। परिवार ने उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए कई सपने संजो रखे थे। परिजनों के अनुसार, 30 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स स्थित ह्यूम हाईवे पर गनिंग के पास यह दर्दनाक हादसा हुआ।
स्थानीय समय के मुताबिक सुबह करीब नौ बजे तुषार ट्रक चला रहा था। इसी दौरान उसके ट्रक की दूसरे ट्रक से भीषण टक्कर हो गई। हादसा इतना गंभीर था कि तुषार की मौके पर ही मौत हो गई। भारतीय समयानुसार सुबह करीब पांच बजे परिवार को हादसे की सूचना मिली। बेटे की मौत की खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस घर में बेटे की वापसी की खुशियां मनाने की तैयारी थी, वहां चीख-पुकार मच गई। इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि तुषार ने मौत से एक दिन पहले, 29 अक्टूबर को ही अपने परिवार से फोन पर बात की थी। बातचीत के दौरान घर में बन रहे नए मकान को लेकर चर्चा हुई थी। परिवार को उम्मीद थी कि जनवरी 2027 में तुषार घर लौटेगा और इसके बाद उसकी शादी की तैयारियां आगे बढ़ेंगी।
परिजनों के मुताबिक, तुषार की शादी की बात चल रही थी और परिवार उसके लिए नया मकान भी बनवा रहा था। किसी ने नहीं सोचा था कि परिवार से फोन पर बात करने के अगले ही दिन उनकी जिंदगी में इतना बड़ा दुख आ जाएगा। तुषार के परिवार में उसकी मां, छोटा भाई, दादी और चाचा हैं। जवान बेटे की मौत के बाद परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में भी इस घटना को लेकर शोक का माहौल है। पिता राकेश कुमार ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया में तुषार के साथी उसके पार्थिव शरीर को भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने में मदद कर रहे हैं।
परिवार को उम्मीद है कि करीब 10 दिनों में बेटे का पार्थिव शरीर गांव पहुंच जाएगा। राकेश कुमार ने सरकार से भी अपील की है कि उनके बेटे के पार्थिव शरीर को जल्द भारत लाने में सहायता की जाए, ताकि परिवार अंतिम बार अपने बेटे के दर्शन कर सके और उसका अंतिम संस्कार कर पाए, जिस बेटे को बेहतर जिंदगी देने के लिए पिता ने अपनी जमीन और पशुबाड़ा बेचकर कर्ज का बोझ उठाया था, उसी बेटे की असमय मौत ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। बेटे की वापसी और शादी के सपने अब अधूरे रह गए हैं। परिवार की आंखें नम हैं और सभी को उस पल का इंतजार है, जब तुषार आखिरी बार अपने गांव लौटेगा।

