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घने कोहरे में ब्लैक स्पॉट बने जानलेवा, कुरुक्षेत्र में दो अलग-अलग हादसों में दो युवकों की मौत

Kurukshetra road accident due to dense fog at black spot area

Kurukshetra road accident due to dense fog at black spot area

कुरुक्षेत्र। जिले में शुक्रवार सुबह कोहरे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी। पहले से चिन्हित ब्लैक स्पॉट पर हुए दो अलग-अलग हादसों में दो युवकों की जान चली गई। दोनों घटनाओं में एक समान बात यह रही कि हादसे उन्हीं सड़कों पर हुए, जहां सुधार के दावे तो किए गए थे, लेकिन जरूरी इंतजाम अब तक पूरे नहीं किए गए।

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सुबह के समय घना कोहरा छाया हुआ था। हालात ऐसे थे कि कई स्थानों पर सामने खड़ा व्यक्ति भी नजर नहीं आ रहा था। इसी दौरान पहला हादसा पिपली क्षेत्र में ब्लैक स्पॉट के पास वीटा बूथ के नजदीक हुआ। सड़क किनारे मौजूद एक युवक को अज्ञात तेज रफ्तार वाहन ने टक्कर मार दी। टक्कर के बाद युवक सड़क पर घिसटता चला गया, जिससे सिर में गंभीर चोट आई और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पहचान के प्रयास शुरू किए। पहचान न होने के कारण शव को सिविल अस्पताल की मोर्चरी में सुरक्षित रखवाया गया है।

दूसरी घटना ढांड रोड पर बारना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के पास सामने आई। यहां उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के बदलू पुरवा गांव निवासी 30 वर्षीय माधव रोजाना की तरह सुबह पैदल काम पर जा रहा था। कोहरे के कारण दृश्यता कम होने के बीच एक बाइक सवार ने उसे टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल माधव ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया, जबकि बाइक चालक मौके से फरार हो गया।

पुलिस ने दोनों मामलों में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। थाना सदर थानेसर और ज्योतिसर चौकी की टीमें आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही हैं, लेकिन धुंध की वजह से फुटेज में साफ तस्वीरें नहीं मिल पा रही हैं। इसके बावजूद पुलिस फरार चालकों तक पहुंचने के प्रयास में जुटी है।

ब्लैक स्पॉट पर इंतजाम कागजों तक सीमित

जिले में लगातार हो रहे हादसे यह सवाल खड़ा कर रहे हैं कि ब्लैक स्पॉट घोषित करने के बाद सुधार की प्रक्रिया आखिर कहां अटक जाती है। सर्दी बढ़ने के साथ धुंध और गहराने की संभावना है, लेकिन सड़क सुरक्षा के जरूरी इंतजाम अब भी अधूरे नजर आ रहे हैं। रिफ्लेक्टर, चेतावनी बोर्ड, स्पीड कंट्रोल और नियमित निगरानी जैसी व्यवस्थाएं कई जगह केवल फाइलों तक सीमित हैं।

ढांड रोड बना खतरे का रास्ता

ढांड रोड पर हालात और भी चिंताजनक हैं। सड़क बने करीब दो महीने हो चुके हैं, लेकिन अब तक उस पर सफेद पट्टियां नहीं लगाई गईं। कोहरे के मौसम में यह कमी हादसों को खुला न्योता दे रही है। इसके अलावा सड़क किनारे झुकी टहनियों को काटने के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। गौरतलब है कि इसी मार्ग पर कुछ समय पहले एक ही हादसे में पांच लोगों की जान जा चुकी है, फिर भी जिम्मेदार विभागों की लापरवाही थमने का नाम नहीं ले रही।

लगातार हो रही मौतों ने साफ कर दिया है कि केवल बैठकें और जागरूकता अभियान सड़क हादसों को नहीं रोक सकते। जब तक ब्लैक स्पॉट पर वास्तविक सुधार नहीं होंगे, तब तक ऐसे हादसे यूं ही लोगों की जिंदगियां छीनते रहेंगे।

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