
Last week to submit SIR forms : फरीदाबाद। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में मतदाता अब भी उदासीन नजर आ रहे हैं।
चुनाव आयोग की ओर से निर्धारित समय सीमा समाप्त होने में अब केवल एक सप्ताह का समय शेष बचा है, फिर भी फॉर्म भरकर बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के पास जमा कराने की रफ्तार अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। आंकड़े बताते हैं कि हजारों पात्र मतदाता अभी तक आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपने फॉर्म जमा नहीं कर पाए हैं, जिससे प्रशासन और चुनाव अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। चुनाव विभाग लगातार जागरूकता अभियान चला रहा है और बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद लोगों की भागीदारी सीमित बनी हुई है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि निर्धारित समय के भीतर फॉर्म जमा नहीं किए गए तो कई मतदाताओं के नाम सत्यापन प्रक्रिया में प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में मतदाताओं से अपील की जा रही है कि वे अंतिम समय का इंतजार न करें और जल्द से जल्द फॉर्म भरकर अपने संबंधित बीएलओ के पास जमा कराएं, ताकि आगामी चुनावों में उनके मतदान अधिकार पर किसी प्रकार का असर न पड़े। प्रशासनिक स्तर पर भी अभियान को गति देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न क्षेत्रों में शिविर लगाए जा रहे हैं, जागरूकता रैलियां निकाली जा रही हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों तक संदेश पहुंचाया जा रहा है।
इसके बावजूद अंतिम सप्ताह में अपेक्षित संख्या में फॉर्म जमा न होना इस बात का संकेत है कि अभी भी बड़ी संख्या में मतदाताओं तक अभियान का संदेश प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पाया है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि शेष बचे सात दिनों में मतदाता कितनी सक्रियता दिखाते हैं और चुनाव आयोग के इस महत्वपूर्ण अभियान को कितना सफल बनाते हैं। उमस भरी गर्मी होने के कारण बीएलओ भी किसी एक स्थान पर बैठे हुए हैं। यदि कोई बीएलओ अपने क्षेत्र में फॉर्म लेने के लिए किसी के घर पहुंच जाता है तो मतदाता एसी से बाहर निकल कर दरवाजा खोलने के लिए तैयार नहीं है।
निर्वाचन क्षेत्र के अधिकारियों की समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर जो फॉर्म मतदाताओं को भरने के लिए बांट दिए हैं, उन्हें भर कर वापस कैसे जमा किया जाए। सबसे ज्यादा परेशानी का सामना बल्लभगढ़ और बड़खल विधानसभा क्षेत्र में करना पड़ रहा है। इन दोनों विधानसभा क्षेत्र में कॉलोनी ज्यादा हैं। मतदाता 2002 में यहां पर रहते थे। अब काफी संख्या में मतदाता इस क्षेत्र को छोड़ कर किसी अन्य स्थान पर रहने लगे हैं। इससे न तो मतदाता मिल रहे हैं और न ही उनके पते-ठिकाने।
यदि ऐसा ही चलता रहा तो जिस विधानसभा क्षेत्र में साढ़े तीन लाख मतदाता हैं वहां पर नाम कटने से संख्या दो लाख पर आकर रुक जाएगी। मतदाताओं के नाम कटने की चिंता अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को दोनों को सता रही है।
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