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लॉर्ड बुद्धा सिटी के मुख्य द्वार का उद्घाटन, विश्व शांति और भाईचारे का दिया संदेश

Lord Buddha City Gateway Inaugurated in Rohtak : रोहतक। भगवतीपुर स्थित लॉर्ड बुद्धा सिटी के मुख्य तोरण द्वार का भव्य उद्घाटन किया गया। समारोह में जापान, श्रीलंका, बर्मा और भारत से आए बौद्ध भिक्षुओं सहित सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

वक्ताओं ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को अपनाकर शांति, करुणा, समानता और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने का आह्वान किया। एससी मोर्चा के अध्यक्ष अजय खुंडिया ने भी समारोह में शिरकत की। आयोजकों ने शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और भाईचारे को बढ़ावा देने के संकल्प को दोहराया।

इस अवसर पर देश-विदेश से आए बौद्ध भिक्षुओं, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों, समाजसेवियों और गणमान्य व्यक्तियों ने शिरकत की। समारोह में भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को अपनाकर शिक्षित, जागरूक, संगठित और समरस समाज के निर्माण का आह्वान किया गया। समारोह में जापान से भन्ते ज्यूंसई थैरासावा महाथेरा, श्रीलंका से भंते वप्प थेरो, बर्मा से भंते हृदय तथा भारत के अलीगढ़ से भंते बोधि रत्न की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई। बौद्ध परंपरा से जुड़े इन विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी ने भगवान बुद्ध के विचारों, मानवीय मूल्यों और विश्व शांति के संदेश को विशेष महत्व प्रदान किया।

समारोह के माध्यम से समाज में प्रेम, सद्भाव, आपसी सहयोग और सामाजिक एकता को मजबूत करने का संदेश दिया गया। वक्ताओं ने भगवान बुद्ध की शिक्षाओं को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि करुणा, विवेक और समानता पर आधारित समाज ही बेहतर भविष्य की नींव रख सकता है। कार्यक्रम में एससी मोर्चा के अध्यक्ष अजय खुंडिया भी विशेष रूप से पहुंचे। उन्होंने तोरण द्वार के उद्घाटन समारोह में भाग लिया और लॉर्ड बुद्धा सिटी की पहल की सराहना की। उनकी उपस्थिति ने समारोह को विशेष महत्व प्रदान किया। लॉर्ड बुद्धा सिटी की परिकल्पना को शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, समानता और भाईचारे के मूल्यों को बढ़ावा देने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।

इसका उद्देश्य समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना और लोगों को सामाजिक उत्थान के लिए प्रेरित करना है। लॉर्ड बुद्धा सिटी का मुख्य तोरण द्वार केवल प्रवेश द्वार नहीं, बल्कि भगवान बुद्ध के विचारों और सामाजिक परिवर्तन के संकल्प का प्रतीक है। यह द्वार शांति, करुणा, मैत्री और समानता जैसे मानवीय मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है। आयोजन के माध्यम से ऐसे समाज के निर्माण पर बल दिया गया, जहां शिक्षा को प्राथमिकता मिले, प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान प्राप्त हो और सामाजिक भेदभाव के स्थान पर समानता एवं भाईचारे की भावना मजबूत हो।

भगवान बुद्ध की शिक्षाएं आज भी मानवता को शांति, सहिष्णुता और विवेक का मार्ग दिखाती हैं। समारोह में सामाजिक जागरूकता और शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया गया। समाज की प्रगति के लिए युवाओं को शिक्षित करना, लोगों को संगठित करना तथा संवैधानिक मूल्यों के प्रति जागरूक बनाना आवश्यक बताया गया। इस अवसर पर सामाजिक उत्थान, समान अवसरों और आपसी सहयोग की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। आयोजकों की ओर से भगवान बुद्ध के विचारों और मानवतावादी संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

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