
Maa Brahmacharini Worship Inspires Patience and Strength : महेंद्रगढ़। नवरात्रि के दूसरे दिन मां दुर्गा के द्वितीय स्वरूप मां ब्रह्मचारिणी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी तपस्या, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प की प्रतीक हैं। पंडित यशपाल शर्मा ने बताया कि मां की आराधना श्रद्धालुओं को धैर्य, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच की प्रेरणा देती है। उन्होंने पूजा-विधि की जानकारी देते हुए कहा कि नवरात्रि में सात्विक जीवन अपनाने, क्रोध-अहंकार से दूर रहने और जरूरतमंदों की सहायता करने का संकल्प लेना चाहिए।
उन्होंने बताया कि नवरात्रि के दूसरे दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने के बाद पूजा स्थल पर मां ब्रह्मचारिणी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करना चाहिए। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर मां को पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन और फल अर्पित करें। पूजा के दौरान श्रद्धापूर्वक ‘ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः’ मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। इसके पश्चात दुर्गा सप्तशती या मां दुर्गा के मंत्रों का पाठ कर आरती करनी चाहिए। पंडित शर्मा ने कहा कि मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का संदेश केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन, वचन और कर्म की पवित्रता, सत्य आचरण, संयम और सेवा भाव को भी महत्व देता है।
नवरात्रि के दौरान क्रोध, अहंकार और नकारात्मक विचारों से दूर रहकर सात्विक जीवन अपनाने का प्रयास करना चाहिए। जरूरतमंदों की सहायता करना और दूसरों के प्रति सद्भाव रखना भी आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी का ध्यान कर जीवन में अच्छे संकल्प लें और परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। उन्होंने कहा कि सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से की गई आराधना व्यक्ति को आत्मविश्वास, धैर्य और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।