अंबाला। नगर निगम चुनाव में इस बार मेयर पद के लिए सियासी मुकाबला दिलचस्प हो गया है। यहां कांग्रेस के विधायक निर्मल सिंह और भाजपा के पूर्व विधायक असीम गोयल आमने-सामने नजर आ रहे हैं। चुनाव भले ही महिला उम्मीदवारों के बीच हो, लेकिन असली लड़ाई पर्दे के पीछे बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा की है।
दोनों की साख से जुड़ा है चुनाव
भाजपा ने युवा चेहरा अक्षिता सैनी को मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने कुलविंदर कौर को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा एक आजाद प्रत्याशी भी मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही है। भाजपा की ओर से पूर्व मंत्री असीम गोयल पूरी रणनीति और चुनाव प्रबंधन संभाल रहे हैं। कांग्रेस की कमान विधायक निर्मल सिंह के हाथों में है। ऐसे में यह मुकाबला सीधे तौर पर दोनों नेताओं की साख से जुड़ गया है। दोनों ही पार्टियों को भितरघात का खतरा है। भाजपा में टिकट न मिलने से कुछ नेता बागी हो गए हैं, जो चुनावी समीकरण बिगाड़ सकते हैं। कांग्रेस में भी गुटबाजी नजर आ रही है, जिससे संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं।
चुनाव से पहले बड़ी सियासत
कांग्रेस को झटका तब लगा जब वार्ड-5 के उम्मीदवार ने नामांकन वापस लेकर भाजपा का समर्थन कर दिया। इस दौरान आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हुए, जिसमें विधायक निर्मल सिंह पर दबाव बनाने के आरोप लगे, हालांकि उन्होंने इन्हें खारिज किया। अंबाला में मेयर पद पर त्रिकोणीय मुकाबला, भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशियों के लिए ये चुनाव चुनौती बन गया है। नगर निगम चुनाव में मेयर पद पर त्रिकोणीय मुकाबला है। जहां भाजपा और कांग्रेस प्रत्याशी अपने-अपने हैं तो इन्हें आजाद प्रत्याशी सोनिया भी चुनौती दे रही हैं। इसके साथ ही भाजपा और कांग्रेस दोनों ने नए चेहरों पर दाव खेला है, यह बात दोनाें के लिए चुनौती बन गई है।
प्रत्याशियों चयन में प्रबंधन अहम
दोनों की ही प्रत्याशियों के चयन से लेकर प्रबंधन तक में प्रमुख भूमिका रही है। भाजपा ने युवा चेहरे के रूप में 32 वर्षीय अक्षिता सैनी तो कांग्रेस ने 60 वर्षीय कुलविंदर कौर को उतारा है। वहीं पूर्व में पार्षद रही चुकीं 42 वर्षीय सोनिया रानी भी आजाद मैदान में हैं। नगर निगम चुनाव में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वर्षों से लोगों की शहर से जुड़ी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी नहीं हो पा रही हैं। वार्डों में सड़कें खराब पड़ी हैं। जलभराव की समस्या से लोग हर साल जूझते हैं। इसके ऊपर प्रॉपर्टी आईडी और एनडीसी ने लोगों को बहुत रुलाया है।
दोनों को भितरघात का खतरा
भाजपा की महिला मेयर शैलजा सचदेवा खुद भी इसका विरोध कर रही थीं। अधिकारियों के खिलाफ लिख चुकी थीं मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं विधानसभा चुनाव में शहर के मतदाताओं ने कांग्रेस से विधायक बनाया था। इसके बावजूद शहर का विकास अटका हुआ है। ऐसे में दोनों पार्टियों के काम और उनके माननीयों को लोग देख चुके हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेताओं को भितरघात का डर है। जहां एक तरफ भाजपा से पूर्व मेयर शैलजा संदीप सचदेवा अब तक चुनावी मैदान में दिखी नहीं हैं। वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस में बने विभिन्न गुट सिटी विधायक निर्मल सिंह समर्थित प्रत्याशियों को कितना साथ देंगे यह भी चुनौती बन रहा है। इसके अलावा भाजपा से टिकट न मिलने पर भाजपा से करीब पांच नेता बागी होकर आजाद मैदान में हैं। वह भी नुकसान पहुंचाने का काम करेंगे।
शहर को उम्मीद देने का अवसर
उधर, बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रोहित जैन ने बताते हैं कि शहर में अधिकतर परियोजनाएं अटकी हैं। जलभराव की समस्या का वर्षों से समाधान नहीं मिला है। ऐसे में जो भी मेयर पद पर जीतेगा उससे लोगों को काफी उम्मीद होगी। इसके साथ ही नगर निगम में व्याप्त भ्रष्टाचार ने भी लोगों को काफी परेशान किया है। इसके समाधान के लिए कड़े फैसले लेने की आवश्यकता है। अगर यह कोई कर पाता है तो वही सफल हो सकेगा।
ये समीकरण भी रहेगा अहम
भाजपा ने सैनी समाज से युवा चेहरे को मैदान में उतारा है तो वहीं कांग्रेस ने पंजाबी सैनी को मौका दिया है। भाजपा सैनी समाज और अपने कोर वोटर के माध्यम से इस चुनाव को जीतना चाहती है। वहीं कांग्रेस ने पंजाबी सैनी को उतारकर इस चुनाव में चुनौती दे दी है। अंबाला सिटी में पंजाबी समाज के लोगों की भी अच्छी तादात है। यही कारण है कि नामांकन के दौरान भाजपा ने दिल्ली से मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा को बुलाया था। उनकी पंजाबी समाज में अच्छी पकड़ है।
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