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भैंसों से करोड़ों का व्यापार, रॉबिन विदेश जाने वालों के लिए मिसाल

Robin : An example for those heading abroad 

Robin : An example for those heading abroad 

Multi-crore business involving buffaloes : करनाल। विदेश जाने की होड़ के बीच बड़थल गांव के युवा रॉबिन ने अपनी मेहनत और लगन से गांव में रहकर ही सफलता की नई कहानी लिखी है। करीब 7-8 साल पहले सिर्फ दो भैंसों से डेयरी शुरू करने वाले रॉबिन ने आज 100 से अधिक पशुओं का आधुनिक फार्म खड़ा कर लिया है। मुर्रा नस्ल की उच्च गुणवत्ता वाली भैंसों के साथ उनका फार्म रोजाना करीब 5 क्विंटल दूध का उत्पादन करता है और हर महीने लाखों रुपये की आमदनी दे रहा है।

रॉबिन ने मात्र 7-8 साल पहले 2 भैंसों से डेयरी फार्मिंग की शुरुआत की थी और आज अपनी कड़ी मेहनत के बल पर करोड़ों का सफल डेयरी व्यवसाय खड़ा कर दिया है। ​रॉबिन ने व्यावसायिक रूप से अपने डेयरी फार्म का विस्तार 2022 में किया। बीते 4 वर्षों में दिन-रात मेहनत करके उन्होंने इसे एक विशाल फार्म का रूप दे दिया है। वर्तमान में उनके फार्म पर 100 से भी अधिक पशु हैं, जिनमें से 30 से 35 भैंसें इस समय दूध दे रही हैं। रॉबिन बताते हैं कि उनके पास 3.5 लाख रुपये से लेकर 12 लाख रुपये तक की उच्च नस्ल की भैंसें हैं।
​रॉबिन मुख्य रूप से मुर्रा ब्रीड पर काम कर रहे हैं। वे अच्छे बुल (सांड) के सीमन का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनके फार्म पर बेहतरीन कटड़े-कटड़ियां तैयार हो रहे हैं। उनके फार्म पर 18 लीटर से लेकर 27 लीटर तक प्रतिदिन दूध देने वाली भैंसें हैं। वे इससे कम दूध देने वाली भैंस अपने फार्म में नहीं रखते। फार्म में रोजाना औसतन 5 क्विंटल दूध का उत्पादन होता है। नीलोखेड़ी डेयरी द्वारा उनका दूध ₹80 प्रति लीटर के हिसाब से खरीदा जाता है। इस प्रकार वे हर महीने लगभग ₹9 लाख से ₹10 लाख का दूध बेच रहे हैं।

​वे खुद की तैयार की हुई फीड और दिन में दो बार साइलेज मिलाकर पशुओं को देते हैं। गर्मियों से बचाने के लिए पशुओं के लिए कूलरों का प्रबंध किया गया है। पशुओं के टहलने के लिए खुला व कच्चा स्थान छोड़ा गया है तथा उनके नहाने के लिए अलग से तालाब भी बनाया गया है। रॉबिन केवल खुद सफल नहीं हुए हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं। उनके फार्म पर बिहार के 5 लोग पिछले 4 वर्षों से स्थायी रूप से काम कर रहे हैं, जो पशुओं के चारे और देखभाल की जिम्मेदारी संभालते हैं। इन श्रमिकों के साथ उनके परिवार के करीब 30 से 40 लोगों की रोजी-रोटी इसी फार्म के जरिए चल रही है।

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