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महेंद्रगढ़ में पीएमश्री स्कूल की हकीकत: बेंच तो दूर, जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर छात्राएं

Students sitting on floor inside PM Shri government school classroom in Mahendragarh

Students sitting on floor inside PM Shri government school classroom in Mahendragarh

महेंद्रगढ़। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पीएमश्री योजना के तहत शहर के राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय को भले ही पीएमश्री का दर्जा मिल गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आई। स्कूल में छात्राओं के बैठने के लिए न तो पर्याप्त फर्नीचर है और न ही दरी जैसी बुनियादी सुविधा। मजबूरी में छात्राएं ठंडी जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रही हैं।

हरियाणा स्कूल शिक्षा निदेशालय द्वारा ठंड के मौसम को देखते हुए स्कूलों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों के पालन की जांच के लिए वीरवार को विभागीय टीम ने महेंद्रगढ़ के दो सरकारी स्कूलों का निरीक्षण किया, जहां कई गंभीर कमियां सामने आईं।

निरीक्षण के दौरान मसानी चौक के पास स्थित पीएमश्री राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कक्षा छठी से 12वीं तक कुल 306 छात्राएं पढ़ती मिलीं। स्कूल पहुंचते ही कॉमर्स संकाय की छात्राएं जमीन पर बैठी हुई नजर आईं। कक्षाओं में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है, जिस कारण खिड़कियां और रोशनदान खुले रखने पड़ते हैं, जिससे ठंड और बढ़ जाती है।

इसके अलावा स्कूल में पीने के पानी की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं पाई गई। आरओ की सुविधा उपलब्ध नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि ठंड के कारण छात्राएं पानी कम पीती हैं और जो गर्म पानी पीना चाहती हैं, वे घर से बोतल लाकर ही काम चला रही हैं।

निरीक्षण में यह भी सामने आया कि स्कूल की चार कक्षाएं खुले में लगाई जा रही हैं। हालांकि वहां दरी और स्टूल की व्यवस्था की गई है। शिक्षकों के अनुसार छात्राएं धूप में बैठना ज्यादा पसंद कर रही हैं, इसलिए कक्षाएं बाहर संचालित की जा रही हैं। निरीक्षण के समय विद्यालय के प्राचार्य जयपाल मौके पर उपस्थित नहीं मिले।

लड़कों के स्कूल में हालात और भी खराब

शहर के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय (लड़के) की स्थिति पीएमश्री स्कूल से भी ज्यादा चिंताजनक पाई गई। यहां कक्षा नौवीं से 12वीं तक 136 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। स्कूल में कुल 9 शिक्षक और एक प्राचार्य कार्यरत हैं।

निरीक्षण के दौरान पाया गया कि तीन कक्षाएं

बरामदे में संचालित की जा रही हैं, जहां विद्यार्थियों को बैठने के लिए दरी तक उपलब्ध नहीं है। छात्र जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। कक्षाओं में डेस्क की संख्या बेहद कम है, जबकि खिड़कियां टूटी हुई और भवन व दरवाजे जर्जर हालत में हैं।

स्कूल के प्राचार्य महेश कुमार ने बताया कि उन्होंने हाल ही में कार्यभार संभाला है। स्कूल का संचालन इसी वर्ष शुरू हुआ है, इसलिए बजट मिलने में समय लगेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले शैक्षणिक सत्र से आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

खंड शिक्षा अधिकारी अलका ने बताया कि निदेशालय की ओर से सभी स्कूलों को नियमों के पालन के लिए स्पष्ट गाइडलाइन जारी की गई है। निरीक्षण में सामने आई कमियों को जल्द दूर कराया जाएगा और लापरवाही पाए जाने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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